डेस्क: महाराष्ट्र के अमरावती जिले के आदिवासी बहुल मेलघाट इलाके में एक सरकारी आश्रम स्कूल में छात्राओं के अचानक हंसने, रोने और फिर अचानक शांत हो जाने की घटनाओं के बाद स्कूल परिसर को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं.
इस घटना की डर से डोमा गांव में स्थित स्कूल से कम से कम 608 छात्र अपने घर लौट गए. अभिभावकों और ग्रामीणों को आशंका थी कि स्कूल परिसर में किसी तरह की ‘भूतिया’ गतिविधि हो रही है.

हालांकि, अधिकारियों और डॉक्टरों ने इसे ‘मास हिस्टीरिया’ यानी सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया बताया है.
16 छात्राओं में दिखे अजीब लक्षण
टीओआई छपी एक स्टोरी के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि यह घटना लगभग एक सप्ताह से अधिक समय पहले शुरू हुई थी, जब 16 छात्राएं अचानक रोने, हंसने और फिर सुन्न पड़ने लगीं. कुछ छात्राओं ने घुंघरुओं जैसी आवाज सुनाई देने की बात भी कही. उप-जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिषेक नायडू ने बताया कि तनाव और चिंता के कारण ऐसी सामूहिक प्रतिक्रिया हो सकती है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में Mass Psychogenic Illness कहा जाता है. राज्य की जनजातीय आयुक्त लीना राठौड़ ने भी गांव पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की.
स्कूल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जनजातीय विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल में कमरों में जरूरत से ज्यादा छात्रों का रहना, भोजन की खराब गुणवत्ता और साफ-सफाई की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं. अधिकारियों ने यह भी कहा कि स्कूल में काउंसलिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और पहली छात्रा के परेशान होने के बाद समय पर उचित प्रतिक्रिया नहीं दी गई. उनका मानना है कि इसी वजह से डर और अफवाहों को फैलने का मौका मिला.
महुआ के पेड़ वाली बात पर प्रिंसिपल की सफाई
अभिभावकों की ओर से दावा किया गया था कि परिसर में महुआ का पेड़ काटे जाने के बाद यह घटना शुरू हुई. हालांकि, स्कूल के प्रधानाचार्य संजय चौधरी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पेड़ छह साल पहले ही काटा जा चुका था. छात्रों की काउंसलिंग के लिए अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की टीम भी स्कूल पहुंची. संगठन के राज्य कार्यकारी समिति सदस्य गणेश हलकारे ने कहा कि जिला प्रशासन मेलघाट में अंधविश्वास के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगा

