डेस्क: लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly elections) को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अध्यक्षता में नई दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी (Assembly elections) की अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें देशभर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में संगठन के विस्तार के साथ-साथ आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की भूमिका और रणनीति पर मंथन किया जा रहा है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनावों को लेकर चिराग पासवान के रुख पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है।
संगठन विस्तार से लेकर चुनावी रणनीति तक चर्चा
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संगठन को मजबूत करने, राज्यों में गतिविधियां बढ़ाने और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा होने की संभावना है।
बिहार सरकार में मंत्री और LJP (रामविलास) नेता संजय पासवान ने कहा कि विधायक बनने के बाद यह उनकी पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक है। उन्होंने बताया कि देशभर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बैठक में पहुंचे हैं और यहां महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।
संजय पासवान ने कहा कि पार्टी के नेता चिराग पासवान जो भी दिशा-निर्देश देंगे, कार्यकर्ता और नेता उसे जमीन पर उतारने का काम करेंगे।
छह राज्यों के चुनावों पर भी होगी चर्चा
संजय पासवान के मुताबिक, बैठक का प्रमुख एजेंडा पार्टी संगठन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और उन चुनावों को लेकर भी बैठक में विचार-विमर्श किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने और आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से सभी नेताओं को एक मंच पर लेकर आई है।
यूपी और पंजाब पर क्यों टिकी निगाहें?
2026-27 के दौरान उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर समेत सात राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। हालांकि, चिराग पासवान की संभावित चुनावी रणनीति को लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब को खास तौर पर अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और चिराग पासवान की पार्टी केंद्र की NDA सरकार में सहयोगी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि LJP (रामविलास) यूपी में अकेले चुनाव लड़ने, गठबंधन में उतरने या सीमित सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का फैसला करती है या नहीं।
दूसरी ओर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। बीजेपी भी राज्य में अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में अगर चिराग पासवान की पार्टी पंजाब में चुनावी मैदान में उतरती है तो उसका NDA की व्यापक रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
चिराग के फैसले पर बीजेपी की नजर
चिराग पासवान इस समय केंद्र सरकार में मंत्री हैं और LJP (रामविलास) बिहार में भी NDA का हिस्सा है। बिहार सरकार में पार्टी कोटे से दो विधायक मंत्री हैं।
यही वजह है कि चिराग पासवान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक और उसमें लिए जाने वाले फैसलों को बीजेपी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी की भविष्य की भूमिका को लेकर चिराग का फैसला NDA के भीतर उनकी राजनीतिक स्थिति का संकेत दे सकता है।
फिलहाल पार्टी की ओर से यूपी या पंजाब में चुनाव लड़ने को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दोनों राज्यों समेत आगामी विधानसभा चुनावों पर चर्चा ने चिराग पासवान की संभावित चुनावी रणनीति को लेकर अटकलें जरूर तेज कर दी हैं।

