नई दिल्ली: NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस बल प्रयोग या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने दोहराया कि शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर किया गया विरोध प्रदर्शन संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए। साथ ही प्रदर्शनकारियों से जुड़ा डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने और सार्वजनिक न करने के भी निर्देश दिए गए। अदालत ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

