डेस्क: भारतीय मूल के नासा (NASA) अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन (Anil Menon) अगले सप्ताह अपने अंतरिक्ष करियर की पहली स्पेसवॉक (Spacewalk) करने जा रहे हैं। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) की तकनीकी क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह स्टेशन के बाहरी हिस्से में जाकर ऊर्जा, संचार और डेटा प्रणाली से जुड़े कई अहम कार्यों को अंजाम देंगे। यह उपलब्धि भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों की वैश्विक पहचान को भी नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
अनिल मेनन 6 अगस्त को अपनी पहली स्पेसवॉक के लिए अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर निकलेंगे। इस मिशन में उनके साथ अनुभवी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर भी होंगी। दोनों मिलकर स्टेशन पर भविष्य में लगाए जाने वाले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे (iROSA) की स्थापना के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करेंगे। यह नई सौर ऊर्जा प्रणाली अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भविष्य के संचालन को अधिक प्रभावी बनाएगी।
स्पेसवॉक के दौरान अनिल मेनन और उनकी साथी अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के बाहरी ढांचे पर कई तकनीकी सुधार करेंगे। इनमें सोलर एरे अपग्रेड करने के साथ आवश्यक हार्डवेयर स्थापित करना भी शामिल है। यह कार्य अंतरिक्ष स्टेशन की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से किया जाएगा। इस मिशन को अंतरिक्ष स्टेशन के दीर्घकालिक संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके बाद 13 अगस्त को निर्धारित दूसरी स्पेसवॉक में दोनों अंतरिक्ष यात्री स्पेस-टू-ग्राउंड संचार प्रणाली से जुड़े एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना अंतरिक्ष स्टेशन और मिशन कंट्रोल सेंटर के बीच डेटा और उच्च गति के संचार का प्रमुख माध्यम है। नए उपकरण लगाए जाने से संचार प्रणाली की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे अंतरिक्ष अभियानों का संचालन और अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी हो सकेगा।
25 अगस्त को प्रस्तावित तीसरी स्पेसवॉक के दौरान पावर चैनल केबल और डेटा रिले सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर लगे नेविगेशन उपकरण को भी बदला जाएगा, जिसका उपयोग अंतरिक्ष यानों की सुरक्षित डॉकिंग के लिए किया जाता है। इन तकनीकी सुधारों से अंतरिक्ष स्टेशन की संचालन क्षमता और भविष्य के मिशनों के लिए उसकी तैयारियां और मजबूत होंगी।
केरल के पलक्कड़ से संबंध रखने वाले अनिल मेनन हाल ही में 14 जुलाई को सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे। वह लगभग आठ महीने तक कक्षा में रहकर विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों, तकनीकी परीक्षणों और अनुसंधान कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उनकी यह लंबी अंतरिक्ष यात्रा भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए उपयोगी वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने में भी सहायक होगी।
हाल के दिनों में अनिल मेनन ने अंतरिक्ष से स्पेसएक्स के साउथ टेक्सास स्थित स्टारबेस लॉन्च परिसर की तस्वीर भी साझा की थी, जिसने अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अब उनकी पहली स्पेसवॉक को लेकर वैज्ञानिक समुदाय और अंतरिक्ष प्रेमियों में विशेष उत्साह है। यह मिशन न केवल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तकनीकी क्षमता बढ़ाने में योगदान देगा, बल्कि भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की वैश्विक अंतरिक्ष अभियानों में बढ़ती भूमिका का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।

