अंतरराष्ट्रीय

सिंधु जल संधि के बाद ‘नैरेटिव वॉर’ की तैयारी? लीक रिपोर्ट्स में पाकिस्तान की नई रणनीति का दावा

डेस्क: ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) और सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर भारत के रुख के बाद पाकिस्तान कथित तौर पर भारत के खिलाफ एक नए “नैरेटिव वॉर” की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों और कथित तौर पर लीक हुई रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठान सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए भारत के खिलाफ माहौल बनाने की योजना तैयार कर रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की कोशिश पंजाब, जम्मू-कश्मीर और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देकर वैश्विक स्तर पर भारत के खिलाफ वैकल्पिक नैरेटिव तैयार करने की है। इसके लिए आने वाले समय में देश और विदेश में विभिन्न कार्यक्रमों तथा मीडिया अभियानों की रूपरेखा भी बनाई जा रही है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सेना और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर घरेलू स्तर पर अपने पक्ष में माहौल बनाने में कुछ हद तक सफल रहे। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किए जाने के फैसले को भी पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता के रूप में पेश किया।
हालांकि, भारत द्वारा सिंधु जल संधि को प्रभावी रूप से स्थगित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान पर नया दबाव बना है। दावा किया जा रहा है कि इसी के जवाब में अब सूचना और प्रचार के मोर्चे पर नई रणनीति तैयार की जा रही है।
मीडिया और सोशल मीडिया पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर डीजी-आईएसपीआर से जुड़े लीक निर्देशों में कहा गया है कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बैठक कर भारत से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति साझा की। दावा है कि इसमें खालिस्तान, जम्मू-कश्मीर और अल्पसंख्यकों से जुड़े विषयों को अधिक प्रचारित करने पर जोर दिया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ एक वैकल्पिक नैरेटिव तैयार किया जा सके।
भारत की आंतरिक चुनौतियों को उभारने का दावा
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कुछ मीडिया संस्थानों से भारत की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए कहा गया है। साथ ही, भारतीय विपक्ष के नेताओं द्वारा सरकार की आलोचना को राजनीतिक लोकतांत्रिक बहस के बजाय अस्थिरता के संकेत के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की रणनीति अपनाने की बात भी कही गई है।
पहले भी अपनाता रहा है ऐसी रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से भारत के खिलाफ सूचना और प्रचार आधारित अभियानों का सहारा लेता रहा है। भारत लगातार आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद, दुष्प्रचार और अलगाववादी गतिविधियों के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश करता है।
1971 के युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच पारंपरिक संघर्ष के साथ-साथ सूचना युद्ध भी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा रहा है। हाल के घटनाक्रमों के बीच एक बार फिर दोनों देशों के बीच नैरेटिव और कूटनीतिक स्तर पर मुकाबला तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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