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चार महीने बाद होगा अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार, बिना केमिकल शरीर सुरक्षित रखने को लेकर सामने आई जानकारी

डेस्क: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के निधन के करीब चार महीने बाद उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार (Funeral rites) किया जा रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह देश के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक हो सकता है। सुरक्षा परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार में हुई देरी के बीच सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि इतने लंबे समय तक उनके पार्थिव शरीर को किस प्रकार सुरक्षित रखा गया।
युद्ध के कारण टलता रहा अंतिम संस्कार
अधिकारियों के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई का 28 फरवरी को तेहरान स्थित उनके आवास पर अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के दौरान निधन हो गया था। शुरुआत में उनका अंतिम संस्कार मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और जारी सैन्य तनाव के चलते कार्यक्रम कई बार स्थगित करना पड़ा।
ईरानी प्रशासन का कहना है कि परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला आवश्यक था और इस दौरान पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं तथा कानूनी मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखा गया।

एम्बामिंग नहीं, कोल्ड स्टोरेज का सहारा
चार महीने तक पार्थिव शरीर सुरक्षित रहने को लेकर कई तरह के सवाल उठे। इस बीच ईरानी अधिकारियों और विशेषज्ञों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, शरीर को संरक्षित रखने के लिए रासायनिक एम्बामिंग (केमिकल संरक्षण) का उपयोग नहीं किया गया। इसके बजाय रेफ्रिजेरेटेड कोल्ड स्टोरेज प्रणाली अपनाई गई।
हालांकि ईरान ने आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया कि पार्थिव शरीर को किस स्थान पर रखा गया था। एक ईरानी अधिकारी ने केवल इतना कहा कि उसे पूरे सम्मान के साथ धार्मिक और कानूनी मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखा गया।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
यूरोन्यूज के अनुसार, अंतिम संस्कार आयोजन के विशेष मुख्यालय के प्रवक्ता इमान अत्तरजादेह ने कहा कि पार्थिव शरीर को इस्लामी नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप सुरक्षित रखा गया तथा उसे न तो दफनाया गया और न ही किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया गया।
वहीं, फॉक्स न्यूज डिजिटल से बातचीत में आतंकवाद-रोधी मामलों के विशेषज्ञ डॉ. उमर मोहम्मद ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर संभावना यही है कि शरीर को रेफ्रिजेरेटेड कोल्ड स्टोरेज में रखा गया। उनके अनुसार, इस्लामी परंपरा में सामान्यतः केमिकल एम्बामिंग स्वीकार्य नहीं मानी जाती, जबकि विशेष परिस्थितियों में शिया धार्मिक कानून विलंबित दफन की अनुमति देता है।
पांच शहरों में नौ दिन तक चलेंगे कार्यक्रम
अधिकारियों के मुताबिक, 3 जुलाई से 9 जुलाई तक ईरान और इराक के पांच शहरों में अंतिम श्रद्धांजलि और अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि इनमें करीब दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों के भी समारोह में पहुंचने की संभावना जताई गई है।
तेहरान में आधिकारिक शोक समारोह की शुरुआत ग्रैंड मोसल्ला परिसर से हुई, जहां विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इमाम हुसैन के दरगाह का झंडा ताबूत पर
अंतिम यात्रा के दौरान खामेनेई के ताबूत को उस लाल पवित्र ध्वज से ढका गया है, जो कभी इमाम हुसैन के दरगाह पर फहराया गया था। ईरानी सरकार के अनुसार यह ध्वज प्रतिरोध, बलिदान और सत्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता है। बताया जाता है कि खामेनेई का परिवार अपना वंश इमाम हुसैन से जोड़ता है।

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