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देश के 12 राज्यों में मखाना की कृषि ,अनुसंधान तथा शोध के लिए हो रही ठोस पहल : डा गोपाल जी ठाकुर

दरभंगा। दरभंगा को मखाना की वैश्विक राजधानी के रूप में पहचान बनाने की की गई सार्थक पहल का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। सुपर फूड के रूप में मखाना को वैश्विक मंच पर मिल रही स्वीकार्यता मिथिला क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है क्योंकि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि मिथिला की अस्मिता का प्रतीक है। मिथिला मखाना नाम से इसे 2022 में भौगोलिक संकेत अर्थात जीआई टैग प्राप्त हुआ था। यही कारण है मखाना अनुसंधान केंद्र के माध्यम से मखाना की खेती को मुख्य फसल बनाने के लिए प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी के सरकार के द्वारा अनेकों पहल और प्रयास किए जा रहे हैं। अब मखाना बोर्ड के माध्यम से देश के 12 राज्यों में अब मखाना की खेती अनुसंधान तथा शोध के लिए पहल शुरू की जा रही है। स्थानीय सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने मंगलवार की देर संध्या मखाना अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिकों के साथ बैठक करने, कृषि यंत्रों का मुआयना करने के बाद उपरोक्त बातें कही।

सांसद डा ठाकुर ने बताया दुनिया का एकमात्र राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र 2002 से दरभंगा में स्थापित है। इस केंद्र में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली, केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान मुंबई और आईआईटी खड़गपुर जैसे संस्थानों से शिक्षित 8वैज्ञानिको की मजबूत टीम के द्वारा उन्नत शोध उपकरण, किसान प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध है 4 वैज्ञानिक शीघ्र ही बढ़ेंगे।

यहां के किसानों द्वारा इस वित्तीय वर्ष में 28 क्विंटल मखाना का बीज दूसरे राज्यों में भेजा गया है तथा इस अनुसंधान केंद्र के माध्यम से 40 हजार हेक्टेयर भूमि में मखाना की खेती की जा रही है तथा इसे बढ़ाने के लिए किसानों को 72,750 रुपए सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।

सांसद डा ठाकुर ने 9 करोड़ की लागत से कृषि अनुसंधान केंद्र परिसर में बने भवन,सड़क,मशीन आदि का अवलोकन किया तथा आवश्यक निर्देश दिए।

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