डेस्क:मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में उस वक्त एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया, जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने चुनाव आयोग (EC) द्वारा अपना नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को देश की शीर्ष अदालत में चुनौती दे दी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को “मनमाना, पक्षपाती और कानून के खिलाफ” बताया और इस मामले में अदालत से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। नटराजन के इस कानूनी कदम से ठीक पहले, उनके नामांकन रद्द होने के कारण राज्य की तीसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही थी। अपनी याचिका में, नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को “मनमाना, पक्षपाती और कानून के खिलाफ” बताया है और सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह बिना देरी किए इस आदेश को रद्द करे। याचिका में तत्काल राहत की मांग की गई है और तर्क दिया गया है कि नॉमिनेशन रद्द करना कानूनी रूप से सही नहीं था और इसने चुनावी प्रक्रिया पर बुरा असर डाला है। उम्मीद है कि नटराजन आज ही सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग करेंगी।
मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा नॉमिनेशन विवाद
मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव में मंगलवार को एक नाटकीय मोड़ आया, जब नटराजन का नॉमिनेशन इस आरोप पर रद्द कर दिया गया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाई थी।

