उत्तर प्रदेश

सरकारी वकीलों की भत्ता वृद्धि के साथ, योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने 24 प्रस्तावों पर लगाई मुहर!

उत्तर प्रदेश:   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को उनके सरकारी आवास पर आयोजित कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई है। सरकारी वकीलों के भत्ते में बढ़ोतरी के साथ मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया और लाखों वाहन स्वामियों को बड़ी राहत दी गई है।

योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने खाद्य एवं रसद विभाग की मक्का क्रय नीति के साथ ही कारागार विभाग, सिंचाई विभाग, आबकारी विभाग, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति, कृषि व स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रस्ताव को दी हरी झंडी दी है। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2400 प्रति कुंतल तय किया गया। मक्का की सरकारी खरीद की अवधि 5 जून से 31 जुलाई तक रहेगी और कई जिलों में मक्का खरीद की व्यवस्था लागू होगी।

कैबिनेट में बंदियों की मृत्यु पर मुआवजे की नई नीति का हरी झंडी दी। जेल में बंदी की मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति को मंजूरी दी गई है। 18 शहरों में GCC मॉडल पर इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी और बड़े शहरों में AC इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होगा। सरकारी वकीलों के मानदेय और भत्ते बढ़ाए गए, मोहनलालगंज में रजिस्ट्री दफ्तर के लिए जमीन मंजूर की गई और पांच जिलों में नई जेलों के निर्माण को मंजूरी मिली है।

 

अहम प्रस्ताव सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाने का था। जिला कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और भत्तों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। दरअसल महाधिवक्ता की फीस वर्ष 2012 और अधिवक्ताओं की फीस वर्ष 2016 से नहीं बढ़ी है। जिला न्यायालयों में तैनात सरकारी वकीलों को हर महीने नौ हजार रुपये रिटेनरशिप मिलता है, जिसे बढ़ाकर अब 14 हजार रुपये तक किया जा सकता है। प्रति हियरिंग फीस भी 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये की जा सकती है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट एडवोकेट्स की रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11000 रुपये हो सकती है। उनको प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,300 रुपये दी जा सकती है। एडवोकेट जनरल को वर्तमान में 75 हजार रुपये महीना रिटेनरशिप मिलता है, जिसे बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये किए जने का प्रस्ताव है। उनकी प्रति हियरिंग फीस 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये हो सकती है।

 

परिवहन विभाग की प्रस्तावित एकमुश्त समाधान (ओटीएस) योजना में पहली बार न सिर्फ पेनाल्टी को पूरी तरह माफ करने बल्कि मूल कर में भी करीब 35 प्रतिशत तक की छूट दी है। इस योजना से 8.48 लाख से अधिक बकायेदार वाहन मालिकों को बड़ा फायदा मिलेगा और सरकार के लिए वर्षों से अटकी राजस्व वसूली का रास्ता भी साफ हो गया। प्रदेश में 30 जनवरी 2026 से 7.5 टन तक के हल्के व्यावसायिक वाहनों पर एक बारीय कर (वन टाइम टैक्स) व्यवस्था लागू की गई है।

 

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 30 जनवरी 2026 तक इस श्रेणी में पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग 29.15 लाख है। इनमें से करीब 8.50 लाख वाहनों पर मूल कर और पेनाल्टी मिलाकर 1,853 करोड़ रुपये का बकाया है। बकाया राशि में 1,073 करोड़ रुपये मूल कर तथा 780 करोड़ रुपये पेनाल्टी के रूप में शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में लंबित बकाये को देखते हुए परिवहन विभाग ने विशेष ओटीएस योजना का प्रस्ताव तैयार किया। प्रस्तावित योजना के तहत पेनाल्टी को शत-प्रतिशत माफ करने के साथ ही पहली बार मूल कर में भी करीब 35 प्रतिशत तक की छूट देने पर विचार हो सकता है। अब तक विभाग द्वारा लागू की गई ओटीएस योजनाओं में केवल पेनाल्टी में ही राहत दी जाती रही है।

विभाग का मानना है कि मूल कर में आंशिक छूट मिलने से बड़ी संख्या में वाहन स्वामी स्वेच्छा से बकाया जमा करेंगे, जिससे राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी। परिवहन विभाग ने ऊर्जा विभाग के बीते वर्ष 13 नवंबर को जारी बिजली बिल राहत योजना का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी विलंब से भुगतान, सरचार्ज, दंड एवं ब्याज में 100 प्रतिशत छूट के साथ ही बिजली बकाये के मूलधन पर भी 25 प्रतिशत की छूट दी गई थी। आबकारी व स्टांप विभाग द्वार वर्ष 2024 में लाई गई ऐसी ही योजनाओं का भी हवाला प्रस्ताव में दिया गया है। विभाग का मानना है कि मूल कर में छूट मिलने से वर्षों से लंबित मामलों का निस्तारण तेजी से हो सकेगा।

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