चंडीगढ़ | पंजाब की राजनीति इस समय एक नए विवाद के कारण सुर्खियों में है, जहां सुरक्षा को लेकर राज्य और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गए हैं। भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में उन राज्यसभा सांसदों की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया, जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस फैसले ने राजनीतिक माहौल को अचानक गरमा दिया।
इन सांसदों में पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह और राघव चड्ढा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। पंजाब सरकार ने न केवल उनकी सुरक्षा हटाई, बल्कि दिल्ली स्थित उनके आवासों से पंजाब पुलिस के जवानों को भी तुरंत वापस बुला लिया। राज्य सरकार का तर्क है कि अब सुरक्षा केवल जरूरत और विशेष परिस्थितियों के आधार पर ही दी जाएगी।
हालांकि, राज्य सरकार के इस कदम के कुछ ही घंटों के भीतर केंद्र सरकार ने तेजी से प्रतिक्रिया दी। केंद्र ने हस्तक्षेप करते हुए इन सभी नेताओं को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की ‘वाई कैटेगरी’ सुरक्षा प्रदान कर दी। बताया जा रहा है कि जहां पहले सीमित संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे, वहीं अब केंद्रीय बलों की एक बड़ी टीम उनकी सुरक्षा में लगा दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राघव चड्ढा की सुरक्षा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले उनके पास Z+ श्रेणी की सुरक्षा थी, जिसे पंजाब सरकार ने हटा लिया था। इसके बाद केंद्र ने उन्हें Z श्रेणी की सुरक्षा देकर स्थिति को संतुलित करने की कोशिश की। यह बदलाव उस समय हुआ जब पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए।
वहीं, हरभजन सिंह को लेकर विवाद और भी ज्यादा बढ़ गया है। उनकी सुरक्षा हटाए जाने के बाद पंजाब में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। जालंधर स्थित उनके घर के बाहर ‘गद्दार’ लिखे जाने की घटना ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता लुधियाना, बठिंडा, फरीदकोट और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी और नेताओं के BJP में शामिल होने की घोषणा ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। कुल मिलाकर, यह मामला अब सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पंजाब की राजनीति में बढ़ती खींचतान और बदलते समीकरणों का बड़ा संकेत बनकर सामने आ रहा है।
आशुतोष झा

