डेस्क: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बदौराकला गांव में एक बुजुर्ग की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. करीब 34 दिन पहले हुई 70 साल के राजदेव खंगार की मौत हो गई थी. अब प्रशासन ने शव को कब्र से बाहर निकलवाया है और पोस्टमार्टम के लिए भेजा है.
मृतक के भतीजे सुनील खंगार ने शुरू से ही इस मौत को संदिग्ध बताते हुए आरोप लगाया था कि उनके चाचा की हत्या जहर देकर की गई है. उन्होंने इस संबंध में 25 मार्च को एसपी, कलेक्टर और डीआईजी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी. जब स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो सुनील भोपाल पहुंचकर डीजीपी से भी गुहार लगा चुके हैं. लगातार प्रयासों के बाद प्रशासन हरकत में आया और शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया गया.
परिजन का आरोप है कि जब वे प्रकाश बम्होरी थाने पहुंचे, तो थाना प्रभारी ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया और उनका आवेदन तक फेंक दिया. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों से मिलीभगत कर जल्दबाजी में शव को बिना पोस्टमार्टम के दफनाने दिया, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ सकी.
परिवार के मुताबिक, 21 मार्च को गांव के ही भानुप्रताप यादव, उनके पुत्र अभिषेक यादव और छोटू यादव राजदेव को अपने साथ ले गए थे. अगले दिन वे उनका शव लेकर लौटे और मौत की सूचना दी. इसके बाद बिना किसी चिकित्सकीय जांच या पोस्टमार्टम के शव को दफना दिया गया, जिससे शक और गहरा गया. वहीं, पुलिस के अनुसार, मृतक की गोद ली हुई बेटी ने बयान दिया है कि राजदेव ने खुद जहरीला पदार्थ खा लिया था. इससे उनकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

