पटना | बिहार अब पारंपरिक विकास मॉडल से आगे बढ़कर सुनियोजित और आधुनिक शहरीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य सरकार ने 11 शहरों को ‘नोएडा-गुरुग्राम’ की तर्ज पर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इन शहरों में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बसाई जाएंगी, जहां विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।
इस योजना के तहत 800 से 1200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक टाउनशिप विकसित की जाएगी, जिसे भविष्य में कई गुना तक विस्तार देने की भी रणनीति है। सरकार का फोकस केवल इमारतें खड़ी करने पर नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित, टिकाऊ और रोजगार देने वाला शहरी ढांचा तैयार करने पर है।
दो चरणों में होगा विकास:
सरकार ने इन 11 शहरों को दो समूहों में बांटा है ताकि विकास कार्य व्यवस्थित तरीके से हो सके। पहले चरण में पटना, गया, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, मुंगेर और सोनपुर जैसे शहर शामिल हैं। दूसरे चरण में मुजफ्फरपुर, भागलपुर, छपरा और सीतामढ़ी को रखा गया है।
पहले समूह के शहरों का मास्टर प्लान मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है, जबकि दूसरे समूह के लिए जून 2027 तक समय तय किया गया है।
लैंड पुलिंग मॉडल से जमीन का प्रबंधन
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक जमीन अधिग्रहण के बजाय ‘लैंड पुलिंग मॉडल’ अपनाया जाएगा। यानी जमीन मालिकों को सीधे मुआवजा देने के बजाय उन्हें विकास में भागीदार बनाया जाएगा। इससे विवाद कम होने और लोगों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
अभी के लिए जमीन खरीद-बिक्री पर रोक
सरकार ने इन प्रस्तावित क्षेत्रों में फिलहाल जमीन की खरीद-बिक्री और नए निर्माण पर रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मास्टर प्लान लागू होने से पहले अनियोजित कॉलोनियों का विस्तार न हो। योजना के आधिकारिक रूप से लागू होते ही यह रोक हटा ली जाएगी।
क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?
बिहार में शहरीकरण की रफ्तार अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। जहां देश में शहरी आबादी लगभग 37% है, वहीं बिहार में यह आंकड़ा अभी करीब 16% के आसपास है। ऐसे में यह परियोजना राज्य के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह योजना जमीन पर सही तरीके से उतरी, तो न सिर्फ निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही लोगों को बेहतर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सुविधाएं एक ही जगह मिल सकेंगी।
बदलाव की ओर बढ़ता बिहार:
हाईटेक टाउनशिप प्रोजेक्ट सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की नई पहचान गढ़ने की कोशिश है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार भी देश के प्रमुख शहरी राज्यों की कतार में खड़ा नजर आ सकता है।
आशुतोष झा

