डेस्क: हिंसा की आग (Fire of Violence) में कई महीनों तक झुलसने के बाद मणिपुर (Manipur) में धीरे-धीरे शांति (peace) लौट रही थी. अब ताजा घटनाओं ने इस प्रदेश के जख्म फिर हरे कर दिए हैं. रविवार रात हजारों लोग (Thousands of people) मणिपुर के कई जिलों में सड़कों पर उतर गए और जबर्दस्त विरोध-प्रदर्शन किया.
ये लोग हाल ही में हुए बम धमाके के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे थे. इस धमाके में दो बच्चों की मौत हो गई थी. इस दौरान इंफाल ईस्ट के कोईरेंगई और हट्टा गोलपाटी, काकचिंग जिला और इंफाल वेस्ट जिले के मयाई लाम्बी में रात के समय रैलियां निकाली गईं. प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प भी हुई. पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इन जिलों के कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.
ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (AMUCO), COCOMI और अन्य संगठनों ने पहाड़ी जिलों में सक्रिय कुकी उग्रवादियों के खिलाफ तत्काल एक्शन की मांग की. रैली में शामिल लोगों ने 2027 की जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करने की भी डिमांड की.
साथ ही 7 अप्रैल को बिष्णुपुर के त्रोंगलाओबी में हुए बम हमले के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की भी मांग की गई, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी. बम हमले के बाद घाटी के पांचों जिलों में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
क्या कहा पुलिस ने?
हालांकि मणिपुर पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से इंफाल के विभिन्न इलाकों में रात के समय रैलियां निकाली जा रही हैं. रैलियों के दौरान कई मौकों पर कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनकारियों के रूप में छिपकर, हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं. इनमें पेट्रोल बम का उपयोग, लोहे के प्रोजेक्टाइल से लैस गुलेल का इस्तेमाल और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी शामिल है.
इन उकसावों के बावजूद, सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करते समय अधिकतम संयम बरता है, ताकि किसी भी तरह का नुकसान न हो. सभी नागरिकों से अपील है कि वे शांति और सौहार्द बनाए रखने में मदद करें और हिंसक प्रदर्शन से दूर रहें. हिंसा में शामिल लोगों के साथ-साथ भड़काने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

