डेस्क: पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा (US-Iran talks inconclusive) रहने के बाद एक बेहद संवेदनशील और गुप्त सैन्य ऑपरेशन (military operation) सामने आया है। इजरायली हमले की आशंका के बीच पाकिस्तान वायु सेना (pakistan air force) ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षित वापस भेजने के लिए 24 लड़ाकू विमानों का सुरक्षा घेरा तैयार किया।
क्यों बढ़ा खतरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के प्रतिनिधिमंडल को डर था कि वापसी के दौरान उनके विमान को निशाना बनाया जा सकता है। यह आशंका इजरायल के हालिया सैन्य रुख और पूर्व कार्रवाइयों के चलते और गहरी हो गई थी।
हालांकि ईरानी पक्ष ने औपचारिक रूप से सुरक्षा की मांग नहीं की, लेकिन पाकिस्तान ने खुद पहल करते हुए उन्हें सुरक्षा देने का फैसला किया।
24 फाइटर जेट्स का कड़ा घेरा
पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह एक बड़ा और जटिल एयर ऑपरेशन था। इसमें चीन निर्मित Chengdu J-10 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान शामिल थे।
साथ ही ‘एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम’ (AWACS) के जरिए हवाई निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते जवाब दिया जा सके।
सीमा से आगे तक एस्कॉर्ट
बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी वायु सेना ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अपनी सीमा से आगे, यहां तक कि तेहरान के करीब तक सुरक्षा कवच दिया। सुरक्षा कारणों से विमान को तेहरान के बजाय किसी अज्ञात स्थान पर उतारा गया।
वार्ता में शामिल थे बड़े नेता
ईरान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर रहे थे।
वहीं अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे। 1979 के बाद यह दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की बातचीत मानी जा रही थी।
इजरायल के रुख ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया संघर्ष के दौरान इजरायल ने ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सख्त चेतावनियों के बाद यह आशंका और बढ़ गई थी।
ट्रंप का बयान और आगे की राह
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और जल्द ही एक और दौर की वार्ता हो सकती है।
आधिकारिक चुप्पी
इस पूरे ऑपरेशन को लेकर अभी तक किसी भी देश की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान, ईरान, अमेरिका और इजरायल—सभी पक्ष इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और परदे के पीछे चल रही रणनीतिक गतिविधियों की गंभीरता को दर्शाता है, जहां हर कदम बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा है।

