डेस्क:महिला आरक्षण संशोधन बिल पर संसद में जारी ऐतिहासिक चर्चा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने न केवल इस बिल के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि परिसीमन (Delimitation) को लेकर राज्यों के मन में उठ रही आशंकाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए है। प्रधानमंत्री ने दक्षिण भारतीय राज्यों की उन चिंताओं पर सीधा प्रहार किया जिनमें परिसीमन के कारण सीटों के नुकसान का डर जताया जा रहा था। पीएम ने गारंटी देते हुए कहा: “मैं भरोसा दिलाता हूँ कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी प्रदेश के आनुपातिक प्रतिनिधित्व को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कानून के साथ देश “एक नई दिशा लेने वाला है।” उन्होंने आगे कहा कि यह बिल आदर्श रूप से 25 से 30 साल पहले ही पास हो जाना चाहिए था, और कहा कि अब इसे पेश करना उनकी सरकार के लिए सौभाग्य की बात है। अपनी पृष्ठभूमि के बारे में भावुक होकर बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं एक बहुत ही पिछड़े समुदाय से आता हूँ और समाज के हर तबके को आगे ले जाना मेरी ज़िम्मेदारी है। महिलाएँ अब पंचायतों से संसद तक जाना चाहती हैं।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के ज़रिए महिलाओं को सशक्त बनाना एक मज़बूत और ज़्यादा समावेशी भारत के लिए ज़रूरी है।

