डेस्क:भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों ने समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर गंभीर विचार विमर्श किया है। मंगलवार से आरंभ हुए कमांडरों के सम्मेलन में नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने अपने संबोधन में वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों को अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज समुद्री सुरक्षा का वातावरण एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां अनेक कारक एक साथ सक्रिय हो रहे हैं। इनमें समानांतर संघर्ष, विरोधी ताकतों की बढ़ती क्षमता, वैश्विक संस्थाओं का कमजोर होना और गैर राज्य तत्वों के लिए हथियार तथा संसाधन जुटाने की लागत में कमी जैसे तत्व शामिल हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर समुद्री क्षेत्र को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और संवेदनशील बना दिया है, जिससे भारतीय नौसेना को प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एडमिरल त्रिपाठी ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उत्पन्न अस्थिरता का सीधा प्रभाव समुद्री यातायात पर पड़ रहा है। उन्होंने इसे इस बात का स्पष्ट संकेत बताया कि सुरक्षा अब सीमाओं से बंधी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न संघर्ष के परिणाम दूर दराज के देशों तक महसूस किए जा सकते हैं। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि संघर्ष से दूरी का अर्थ यह नहीं है कि उसके प्रभावों से भी दूरी बनी रहेगी।

