अर्थ

कपड़ा बाजार पर भी असर…10 से 12 प्रतिशत बढ़ गए कपड़ों के दाम

डेस्क: अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच चल रहे युद्ध (war) का असर कपड़ा बाजार (Textile Market) पर भी नजर आने लगा है। कपड़ा बनाने और उसे मशीन में धोने के लिए जो पेट्रोकेमिकल (Petrochemical) आता है उसके भाव बढ़ गए हैं और कपड़ा महंगा हो चला है। 28 फरवरी से जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से कपड़े में 10 से 12 प्रतिशत भाव बढ़ गए हैं। ऐसे में जब शादी-विवाह की खरीदी चल रही है, तब लोगों को कपड़ा महंगा पड़ रहा है। हालांकि कई व्यापारी पुराने स्टॉक को निकाल रहे हैं, जिसके कारण अभी बाजार में मारामारी नहीं है।

यार्न में पेट्रोकेमिकल लगता है, जिसके भाव इन दिनों बढ़े हुए हैं। जो पॉलिएस्टर के कपड़े भी आते हैं उनके भाव भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अधिकतर लोग पॉलिएस्टर के कपड़े पहनते हैं, इसलिए उन्हें कपड़ा महंगा पड़ रहा है। एक तरह से पेट्रोकेमिकल कपड़े के उत्पादन में कई काम आता है। कपड़ा व्यापारी राजेश आजाद ने बताया कि प्रोसेसर और भ_ी में पेट्रोकेमिकल का उपयोग किया जाता है। इस कारण भी कपड़ा महंगा हुआ है। जो व्यापारी 1 हजार मीटर माल मंगाता था, वह अब 200 से 500 मीटर ही मंगवा रहा है, ताकि अगर मंदी आए तो उसे नुकसान नहीं उठाना पड़े। एक अन्य व्यापारी का कहना है कि डिमांड पर सप्लाय घटा है और डिमांड अभी कम हो रही है, क्योंकि भाव बढ़े हुए हैं। सभी तरह के फैब्रिक में अपने-अपने हिसाब से तेजी बनी हुई है।

कपड़ा उत्पादन भी प्रभावित

इंदौर के मार्केट में भीलवाड़ा और सूरत से कपड़ा आता है। यहां फैक्ट्री मेेें कपड़े का उत्पादन महंंगा हो रहा है और इसी कारण कपड़ा महंंगा पड़ रहा है। इसके साथ-साथ मुंबई से भी कपड़ा आता है। स्थानीय स्तर पर नागदा से भी कपड़े की सप्लाई होती है।

कारीगर भी प्रभावित होने लगे

कपड़ा बाजार में विशेषकर फैक्ट्री में जो कर्मचारी काम करते हैं, वे भी प्रभावित हो रहे हैं। गैस की टंकी नहीं मिलने के कारण वे अपने घरों को लौटने लगे हैं। इस कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि इससे भी लागत बढ़ रही है, क्योंकि कर्मचारियों की सैलेरी और ेेमेहनताना बढ़ रहा है.

पैकिंग का सामान भी हो गया है महंगा

कपड़े के भाव तो बढ़े ही हैं, वहीं कपड़ों की पैकिंग का सामान भी महंगा हो चला है। साड़ी और सूटिंग-शर्टिंग जिस प्लास्टिक में पैक की जाती है, उसके भाव बढऩे से कपड़े की लागत भी बढ़ गई है। वहीं बाहर से जो माल आता है उसके कार्टून की लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके कारण कपड़ों के भाव बढ़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *