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परिसीमन और महिला आरक्षण पर ‘आर-पार’, जानें क्यों छिड़ा है सियासी संग्राम

डेस्क:गुरुवार से भारतीय संसद का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र में केंद्र सरकार तीन ऐसे विधेयक पेश करने जा रही है, जो न केवल भारतीय राजनीति का भविष्य तय करेंगे, बल्कि संसद की संरचना को भी पूरी तरह बदल देंगे। जहाँ सरकार इसे ‘सशक्तिकरण और सुधार’ का नाम दे रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर मोर्चा खोल दिया है। संसद में पेश होने वाले 3 मुख्य बिल
सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विधेयकों का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण (परिसीमन), लोकसभा सीटों में वृद्धि और महिला आरक्षण को प्रभावी बनाना है:

संविधान (131वां संशोधन) बिल: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इसे पेश करेंगे। यह बिल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करने का रास्ता साफ करेगा। खास बात यह है कि इसमें 1971 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा। परिसीमन बिल, 2026: इस विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने का प्रस्ताव है।

केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026: गृह मंत्री अमित शाह इसे पेश करेंगे, ताकि प्रशासनिक और कानूनी प्रावधानों को नए बदलावों के अनुकूल बनाया जा सके।

कौन से तीन बिल पेश किए जाएंगे?
जो तीन बिल पेश किए जाएंगे, वे हैं – संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन बिल, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026। संविधान (131वां संशोधन) बिल, जिसे केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय करने और सीटों के पुनर्वितरण का रास्ता साफ़ करेगा। इसमें 1971 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना का इस्तेमाल किया जाएगा।

परिसीमन बिल, 2026, जिसे मेघवाल ही पेश करेंगे, में एक नए सिरे से परिसीमन प्रक्रिया चलाने का प्रस्ताव है। इसके तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 कर दी जाएगी। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पेश करेंगे। इसका मकसद कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों को प्रस्तावित बदलावों के अनुरूप बनाना है।

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