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ईरान युद्ध पर पीट हेगसेथ बोले- राष्ट्रपति ट्रंप कभी मजाक नहीं करते, मंगलवार बनेगा तेहरान के लिए बुरा सपना?

डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका (US) और इस्राइल (Israel) के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान (Iran) भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 39वें दिन में प्रवेश कर रहा है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। ऐसे में जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान को खुली धमकियों ने वैश्विक चिंताओं को बढ़ा रखा है। वहीं दूसरी ओर अब अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने भी ईरान युद्ध को लेकर बहुत बड़े संकेत दिए हैं।

हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर सोमवार को अब तक के सबसे ज्यादा हवाई हमले किए जाएंगे। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया, तो मंगलवार को हमले और भी ज्यादा होंगे। हेगसेथ ने ईरान को चेताते हुए कहा कि ईरान समझदारी से फैसला करे, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मजाक नहीं करते। बता दें कि हेगसेथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने ईरान को तबाह करने के लिए मंगलवार रात आठ बजे तक का अल्टीमेटम दिया है।

एक ही रात में ईरान को खत्म कर सकता है अमेरिका- ट्रंप

इससे पहले व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर फिर से बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास इतनी सैन्य शक्ति है कि वह सिर्फ एक रात में पूरे ईरान को जड़ से मिटा सकता है। उन्होंने कहा वह रात कल भी हो सकती है। ट्रंप ने कहा कि पिछले 37 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़ा हवाई अभियान चलाया है। इस दौरान 10,000 से ज्यादा उड़ानें भरी गईं और 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए।

अमेरिकी सैन्य मिशन की भी दी जानकारी

इसके साथ ही प्रेस वार्ता में ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य मिशन की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने अपने एक पायलट को बचाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया है। यह पायलट ईरान के अंदर यानी दुश्मन के इलाके में गिर गया था। वहां हालात बहुत ही ज्यादा खतरनाक थे। इस जांबाज पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका ने अपने 200 सैनिकों को मिशन पर लगाया था। इस पूरे ऑपरेशन में 21 अमेरिकी विमानों ने हिस्सा लिया।

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