
दरभंगा। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी, मुकुंद चौधरी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री, धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखकर निजी विद्यालयों द्वारा महंगी पुस्तकों के माध्यम से अभिभावकों पर डाले जा रहे आर्थिक बोझ के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा वर्तमान समय में कई निजी विद्यालय शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन द्वारा छात्रों को निर्धारित निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, जिससे आम परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि देशभर में एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए, निजी पुस्तकों के मूल्य पर सीमा तय की जाए तथा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पुस्तक खरीदने के लिए बाध्य करने की प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई विद्यालय इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुकुंद चौधरी ने इसे केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि “यह शिक्षा नहीं, बल्कि शोषण है, जिसे हर हाल में रोकना आवश्यक है” उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग की, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित हो सके। पत्र के माध्यम से केंद्रीय शिक्षा मंत्री से उन्होंने कुछ बुनियादी मांग किया। देश भर के सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी पुस्तकों को अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जाए, जिससे गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती शिक्षा सुनिश्चित हो सके, निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित की जाए, ताकि अभिभावकों का शोषण रोका जा सके, किसी भी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को विशेष दुकान या विक्रेता से पुस्तक खरीदने के लिए बाध्य करने की प्रथा को तत्काल प्रतिबंधित किया जाए, नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई, जिसमें मान्यता रद्द करने तक का प्रावधान हो, सुनिश्चित किया जाए, इस विषय की निगरानी हेतु एक प्रभावी शिकायत एवं निरीक्षण तंत्र स्थापित किया जाए, ताकि अभिभावकों को त्वरित न्याय मिल सके।