
दरभंगा : दृश्य एवं प्रदर्शनकारी कला की संगीत, साहित्य, कला, संस्कृति, परम्परा आदि पर आधारित महत्वपूर्ण शोध पत्रिका “भैरवी” के 29 वें संयुक्तांक (जुलाई-दिसंबर 2025) का कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के हाथों उनके आवासीय सभागार में विमोचन किया गया। कुलपति ने इस स्तरीय शोध पत्रिका, प्रधान संपादक प्रो पुष्पम नारायण एवं मिथिलांचल संगीत परिषद्, विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग की सराहना करते हुए कहा कि शोध पत्रिकाओं एवं पुस्तकों का प्रकाशन इस शोध विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक ही नहीं, बल्कि गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन अन्य सभी विभागों एवं महाविद्यालयों के द्वारा भी होना चाहिए, ताकि उनमें राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की विद्वानों के शोध आलेख प्रकाशित हो सकें, जिनका लाभ यहां के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को मिल सके। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2009 से ही नियमित प्रकाशित भैरवी शोध पत्रिका यूजीसी से 2018 में स्वीकृत एवं 2021 में यूजीसी केयर लिस्ट पत्रिकाओं में शामिल हुई और पुनः Cross Ref से DOI प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय संपादक मंडल की देखरेख एवं प्रधान संपादक प्रो पुष्पम नारायण की दूरदर्शी सोच से प्रकाशित हो रही है जो विश्वविद्यालय ही नहीं पूरे मिथिलांचल एवं बिहार के लिए गर्व की बात है। प्रधान संपादक प्रो पुष्पम नारायण ने बताया कि इस छमाही शोध पत्रिका में हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा के शोध आलेख प्रकाशित किए जाते हैं। इस अंक में देश के विभिन्न राज्यों के तीन दर्जन के लगभग शोध आलेख प्रकाशित किए गए हैं। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग से प्रकाशित, DOI-10.65403 प्राप्त यह इस विश्वविद्यालय की पहली पत्रिका है, जिसका आईएसएसएन- 0975-5217 है। विमोचन के अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’, डॉ अभिषेक स्मिथ, डॉ पुष्कर कुमार झा, पीआरओ डॉ आर एन चौरसिया के अलावा सिंडिकेट के सदस्य, अनेक पदाधिकारी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित थे।
