डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(President Donald Trump) ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर(Supreme Leader) को लेकर बड़ा और विवादित बयान(controversial statement,) दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अयातुल्ला अली खामेनेई(Ayatollah Ali Khamenei)के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला सर्वोच्च नेता बनाए जाने को वह स्वीकार नहीं करेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में उन्हें शामिल होना होगा क्योंकि अमेरिका चाहता है कि ईरान में ऐसा नेतृत्व सामने आए जो शांति और संवाद (peace and dialogue)को बढ़ावा दे।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि खामेनेई का बेटा उन्हें मंजूर नहीं है और अमेरिका किसी ऐसे व्यक्ति को ईरान का अगला नेता देखना चाहता है जो क्षेत्र में स्थिरता और मेलजोल की दिशा में काम करे। ट्रंप ने यह भी कहा कि नए नेतृत्व के चयन में उन्हें भूमिका निभानी होगी और उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी वेनेजुएला से जुड़े मामलों में इस तरह की राजनीतिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद से देश में नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खामेनेई ने करीब 37 वर्षों तक ईरान की सत्ता संभाली थी और उनके निधन के बाद पहली बार देश को नया सर्वोच्च नेता चुनना पड़ रहा है।
ईरान में सर्वोच्च नेता का पद बेहद शक्तिशाली माना जाता है। युद्ध और शांति से जुड़े फैसलों से लेकर परमाणु कार्यक्रम और विदेश नीति तक लगभग सभी अहम मामलों में अंतिम निर्णय सुप्रीम लीडर ही लेते हैं। ऐसे में इस पद के लिए चुने जाने वाले व्यक्ति का ईरान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
संभावित उत्तराधिकारियों की चर्चा में खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। मोजतबा शिया धर्मगुरु हैं और ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ उनके करीबी संबंध बताए जाते हैं। हालांकि उन्होंने अब तक कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला है। इसके बावजूद ईरान की सत्ता व्यवस्था में उन्हें प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है और कई विश्लेषक उन्हें अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी मानते रहे हैं।
हालांकि ईरान की इस्लामी व्यवस्था लंबे समय से वंशानुगत शासन की आलोचना करती रही है। ऐसे में यदि खामेनेई के बेटे को ही सर्वोच्च नेता बनाया जाता है तो यह बहस और विवाद का विषय बन सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में संकेत दिया था कि देश में नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है और इस सप्ताह के भीतर नए नेता की घोषणा संभव है। ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर का चयन 88 सदस्यीय विशेषज्ञों की परिषद करती है। इस परिषद में शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं और उन्हें देश की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
इन विशेषज्ञों का चयन जनमत के जरिए होता है और उनकी उम्मीदवारी को ईरान की संवैधानिक निगरानी संस्था गार्डियन काउंसिल की मंजूरी मिलती है। माना जाता है कि अयातुल्ला खामेनेई का इन दोनों संस्थाओं पर काफी प्रभाव रहा है। इसी वजह से कई विश्लेषकों का मानना है कि अगला सर्वोच्च नेता भी संभवतः उसी विचारधारा से जुड़ा हो सकता है जो अब तक ईरान की सत्ता में प्रभावी रही है।
ऐसे संवेदनशील समय में ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है क्योंकि ईरान के आंतरिक नेतृत्व चयन में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी रहती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान की सत्ता संरचना किसे अपना अगला सर्वोच्च नेता चुनती है और इससे क्षेत्रीय तथा वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
