डेस्क: अमेरिका, इजरायल और ईरान (America, Israel and Iran) के बीच जारी सैन्य तनाव चौथे दिन और तेज हो गया है। इस बीच पेंटागन से जुड़ी एक लीक रिपोर्ट (Pentagon report) ने अमेरिकी सैन्य तैयारियों (US military preparedness) को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका अगले 10 दिनों तक ईरान के खिलाफ इसी तरह हमले जारी रखता है तो उसके कई अहम मिसाइल भंडार तेजी से खत्म हो सकते हैं।
ट्रंप के बयान के बाद शुरू हुआ सैन्य ऑपरेशन
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता पर नाराजगी जताई थी। इसके कुछ ही घंटे बाद उन्होंने बड़े सैन्य अभियान को मंजूरी दे दी। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने की खबर सामने आई।
हमले के जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
पेंटागन की चेतावनी, हथियारों की कमी का खतरा
रिपोर्टों के मुताबिक पेंटागन ने व्हाइट हाउस को आगाह किया है कि लंबा युद्ध अमेरिका के लिए हथियारों के भंडार को दोबारा भरने के लिहाज से बेहद महंगा साबित हो सकता है। इससे पहले फरवरी में आई एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि यूक्रेन और इजरायल को दी जा रही सैन्य मदद के कारण अमेरिका के कई महत्वपूर्ण हथियारों का रिजर्व पहले ही कम हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली मुख्य रूप से रूस या चीन जैसे बड़े देशों के सीमित हमलों को रोकने के लिए तैयार की गई थी, लेकिन ईरान जैसे लगातार रॉकेट और ड्रोन हमलों के सामने यह चुनौती बढ़ सकती है।
ट्रंप का दावा—अमेरिका के पास असीमित हथियार
इन आशंकाओं के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि अमेरिका के पास हथियारों का लगभग असीमित भंडार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन हथियारों के दम पर लंबे समय तक सफलतापूर्वक युद्ध लड़ सकता है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ अभियान चार से पांच सप्ताह के लिए तैयार किया गया था, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे और लंबा किया जा सकता है।
किन हथियारों की कमी की आशंका
रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिका के कई उन्नत हथियार तेजी से खर्च हो रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
THAAD इंटरसेप्टर्स – पिछले संघर्ष में लगभग 25% यानी 150 इंटरसेप्टर इस्तेमाल हो चुके हैं।
JDAM किट्स – साधारण बमों को सटीक स्मार्ट बम में बदलने वाली जीपीएस गाइडेड तकनीक पर भी दबाव बढ़ा है।
SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइलें – इनकी उत्पादन गति धीमी होने से भंडार तेजी से घट रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान हर महीने करीब 100 मिसाइलें तैयार कर रहा है, जबकि अमेरिका की उत्पादन क्षमता महीने में केवल 6–7 इंटरसेप्टर तक सीमित है।
युद्ध की भारी आर्थिक कीमत
इस संघर्ष का अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।
पहले 24 घंटे का खर्च: लगभग 779 मिलियन डॉलर (करीब 6900 करोड़ रुपये)
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप संचालन: रोजाना लगभग 6.5 मिलियन डॉलर (करीब 58 करोड़ रुपये)
हमले से पहले की सैन्य तैयारी: करीब 630 मिलियन डॉलर (करीब 5556 करोड़ रुपये)
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो अमेरिका को करीब 210 बिलियन डॉलर (लगभग 18.8 लाख करोड़ रुपये) तक खर्च करना पड़ सकता है।
पहले से ही अरबों डॉलर खर्च
ब्राउन यूनिवर्सिटी की ‘कॉस्ट ऑफ वॉर’ रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2023 से अब तक अमेरिका इजरायल को करीब 21.7 बिलियन डॉलर की सैन्य सहायता दे चुका है। मध्य-पूर्व में अन्य अभियानों को मिलाकर यह खर्च 31 से 33 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच चुका है।
यानी यदि संघर्ष लंबा चला, तो अमेरिका को सैन्य ताकत के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी भारी दबाव झेलना पड़ सकता है।
