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ईरान पर अटैक से Share Market Crash… इन सुरक्षित निवेश की ओर भागे लोग

डेस्क: मिडिल ईस्ट में भड़की भीषण जंग की आग अब वैश्विक बाजारों को अपनी चपेट में ले चुकी है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों ने पूरे क्षेत्र के समीकरण बदल दिए हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत दुनिया भर के निवेशकों की जेब पर पड़ा है।

मिडिल ईस्ट में युद्ध का विस्तार: 10 देश आमने-सामने

शनिवार को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सिलसिलेवार हमलों ने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने दुबई, आबू-धाबी, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख शहरों को निशाना बनाया, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तबाही का मंजर है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब तक इस संघर्ष में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 10 देश शामिल हो चुके हैं। शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है, क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान, दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार: निवेशकों के 6.60 लाख करोड़ स्वाहा

युद्ध की खबरों के बीच सोमवार को जब भारतीय शेयर बाजार खुला, तो दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक मंडे’ जैसा माहौल दिखा। सेंसेक्स 2700 अंकों की भारी गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी में 500 अंकों का बड़ा गोता देखने को मिला। हालांकि, दिन के दौरान निचले स्तरों से कुछ रिकवरी जरूर हुई, लेकिन बाजार भारी नुकसान के साथ ही बंद हुआ।
सेंसेक्स: 1048 अंक (1.28%) गिरकर 80,238 पर बंद।
निफ्टी: 312 अंक (1.24%) गिरकर 24,865 पर बंद।
नुकसान: इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में लगभग 6.60 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

सोने-चांदी और कॉपर में रिकॉर्ड तेजी: सुरक्षित निवेश की ओर भागे लोग

शेयर बाजार में मची भगदड़ के विपरीत, निवेशकों ने सोने और चांदी जैसे सुरक्षित ठिकानों (Safe Haven) का रुख किया है। भारी मांग के कारण इनकी कीमतों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया:

सोना: MCX पर सोना 7000 रुपये की छलांग लगाकर 1.69 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
चांदी: चांदी की कीमतों में 14,000 रुपये की जबरदस्त तेजी आई, जिससे यह 2.97 लाख रुपये प्रति किलो के करीब जा पहुंची।
कॉपर: औद्योगिक धातुओं में कॉपर के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
ट्रेंड: लोग न केवल फिजिकल सोना-चांदी, बल्कि इनके ETF (Gold & Silver ETFs) में भी जमकर पैसा लगा रहे हैं।

कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल

युद्ध की सबसे ज्यादा मार कच्चे तेल पर पड़ी है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही कच्चे तेल के दाम 13% तक उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जंग हफ्ता-दस दिन और खिंचती है, तो ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बहुत जल्द 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

आगे क्या? विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 7 से 10 दिनों तक स्थिति सामान्य होने के आसार कम हैं। जब तक युद्ध विराम या तनाव कम होने के संकेत नहीं मिलते, तब तक शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सतर्क रहें, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सोने और चांदी में तेजी का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।

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