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रुद्रम-II की सफलता से भारत बना विश्‍व शक्तिमान, कोई नहीं है टक्‍कर में!

डेस्क: वैश्विक रक्षा पटल पर भारत ने एक बार फिर अपनी स्वदेशी ताकत का लोहा मनवाया है. DRDO द्वारा विकसित रुद्रम-II एंटी-रेडिएशन मिसाइल ने आधुनिक युद्ध के मैदान में समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है.

यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं बल्कि भारतीय वायुसेना का वह अदृश्य काल है जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को उसकी ही सीमा में घुसकर अंधा करने की ताकत रखता है. जब बात अत्याधुनिक रडार डिस्ट्रॉयर मिसाइलों की आती है तो अब तक अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों का दबदबा माना जाता था. लेकिन रुद्रम-II के सफल परीक्षणों ने ड्रैगन के घमंड को चूर-चूर कर दिया है और पेंटागन (अमेरिका) के सबसे घातक हथियारों को बराबरी की टक्कर दी है. अपनी हाइपरसोनिक गति और मारक क्षमता के दम पर रुद्रम-II ने साबित कर दिया है कि भारत अब किसी भी फ्रंट पर पीछे नहीं है.

 

रुद्रम-II एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में झुकाता है. चीन का पूरा सैन्य तंत्र नेटवर्क और एडवांस रडार गाइडेड मिसाइलों पर टिका है. रुद्रम-II विशेष रूप से SEAD (Suppression of Enemy Air Defences) ऑपरेशन्स के लिए बनी है. इसका सीधा मतलब यह है कि युद्ध के शुरुआती चरणों में यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान के रडार नेटवर्क को पंगु बना देगी. एक बार जब दुश्मन का रडार सिस्टम बंद हो जाएगा तो भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट और बॉम्बर्स बिना किसी खतरे के दुश्मन के आसमान में घुसकर उसके बाकी ठिकानों को तबाह कर सकेंगे. गति के मामले में चीनी मिसाइलों (जैसे LD-10) को पछाड़कर भारत ने इस श्रेणी में अपनी बादशाहत कायम कर ली है.

 

रुद्रम-II: तकनीक का दम

रुद्रम-II को भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है:

• रेंज: लगभग 150 से 300 किलोमीटर (यह फाइटर जेट की लॉन्चिंग ऊंचाई पर निर्भर करती है).

• गति: मार्क 5+ (Supersonic से Hypersonic की ओर), जो इसे दुनिया की सबसे तेज एंटी-रेडिएशन मिसाइलों में से एक बनाती है.

• पेलोड: लगभग 200 किलोग्राम का भारी-भरकम वॉरहेड, जो कंक्रीट बंकरों को भी नष्ट कर सकता है.

• वजन: लगभग 600 से 700 किलोग्राम.

• लागत: स्वदेशी तकनीक से निर्मित होने के कारण इसकी निर्माण लागत विदेशी मिसाइलों (जैसे रूसी Kh-31) की तुलना में बेहद कम और किफायती है.

 

मुख्य फीचर्स और ताकत

• पैसिव रडार सीकर: यह मिसाइल दुश्मन के रडार और जैमर्स से निकलने वाले रेडियो सिग्नलों को खुद-ब-खुद ट्रैक करती है.

• मेमोरी लॉकिंग सिस्टम: यदि दुश्मन को मिसाइल के आने का पता चल जाए और वह अपना रडार सिस्टम ऑफ (OFF) भी कर दे, तब भी रुद्रम-II अपनी मेमोरी के आधार पर उसकी आखिरी लोकेशन ढूंढकर उसे मलबे में बदल देती है.

• दोहरी भूमिका: यह न केवल रडार को नष्ट करती है बल्कि एयर-टू-सरफेस (हवा से सतह) मोड में दुश्मन के एयरस्ट्रिप्स, कमांड सेंटर्स और बंकरों पर भी पिन-पॉइंट निशाना लगा सकती है.

• NavIC बैकअप: इसमें अमेरिकी जीपीएस के अलावा भारत का अपना नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (NavIC) इंटीग्रेटेड है जिससे युद्ध के समय भी इसकी सटीकता प्रभावित नहीं होती.

 

रुद्रम-II 5 मुख्य बातें

1. चीन के डिफेंस की छुट्टी: चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जो रडार और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं, रुद्रम-II युद्ध की स्थिति में पहले ही घंटे में उन्हें अंधा करने की क्षमता रखती है.

2. अमेरिका से सीधी टक्कर: अमेरिका की प्रसिद्ध AGM-88 HARM मिसाइल की गति जहां मार्क 2 से 4 के बीच है, वहीं भारत की रुद्रम-II मार्क 5+ की रफ्तार से हमला करती है, जो इसे अमेरिकी तकनीक के बराबर या उससे तेज बनाती है.

3. दुश्मन की सीमा से बाहर से प्रहार: 300 किमी की स्टैंड-ऑफ रेंज के कारण भारतीय पायलटों को दुश्मन की मिसाइल रेंज में घुसने की जरूरत नहीं है; वे अपनी सीमा में रहकर ही तबाही मचा सकते हैं.

4. भारी पेलोड क्षमता: जहां अमेरिकी मिसाइलों का वॉरहेड हल्का होता है, वहीं रुद्रम-II का 200 किलो का पेलोड पूरे रडार स्टेशन को इंफ्रास्ट्रक्चर समेत जमींदोज कर देता है.

5. पूर्ण आत्मनिर्भरता: इस मिसाइल के आने से भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे देश रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना है.

 

रुद्रम-II बनाम अमेरिका, रूस और चीन के हथियार

 

  • पैरामीटर / विशेषता भारत (Rudram-II) अमेरिका (AGM-88 HARM) रूस (Kh-31P) चीन (LD-10 / YJ-91)
  • मिसाइल का नाम रुद्रम-II AGM-88 HARM / AARGM-ER Kh-31P / Krypton LD-10 / YJ-91
  • अधिकतम रेंज (Range) 150 से 300 किमी 150 से 300 किमी (लेटेस्ट वर्जन) 110 से 200 किमी 150 से 200 किमी
  • रफ्तार (Speed) मार्क 5+ (हाइपरसोनिक के करीब) मार्क 2 से 4 (सुपरसोनिक) मार्क 3.5 (सुपरसोनिक) मार्क 3+ (सुपरसोनिक)
  • वॉरहेड / पेलोड (Payload) ~200 किलोग्राम ~68 से 90 किलोग्राम ~90 किलोग्राम ~90 से 150 किलोग्राम
  • कुल वजन (Weight) ~600 – 700 किलोग्राम ~360 किलोग्राम ~600 किलोग्राम ~400 – 600 किलोग्राम
  • मुख्य गाइडेंस सिस्टम INS + GPS + NavIC + पैसिव सीकर INS + GPS + मिलिमीटर वेव INS + पैसिव रडार सीकर INS + GPS + पैसिव सीकर
  • विशेष खूबी भारी तबाही + रडार बंद होने पर भी अचूक मेमोरी दशकों का कॉम्बैट एक्सपीरियंस (युद्ध में जांची हुई) बेहद तेज और स्क्रैमजेट इंजन तकनीक रूसी तकनीक की कॉपी पर आधारित

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