
दरभंगा। मिथिला की सांस्कृतिक धरती पर होली के रंगों और लोकपरंपराओं की अद्भुत छटा उस समय देखने को मिली। राज्यसभा सांसद डॉ . धर्मशीला गुप्ता मिथिला की पारंपरिक होली के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आईं। मिथिला की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक फगुआ गीतों, लोकधुनों, सांस्कृतिक प्रस्तुति ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कई महिलाओं ने सामूहिक रूप से मिथिला के पारंपरिक होली गीत गाकर कार्यक्रम में भागीदारी रही। मिथिला की पहचान ‘पाग’ की गरिमा और सांस्कृतिक आभा भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द,भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में आपसी भेदभाव को मिटाकर एकता और सद्भाव को सुदृढ़ करता है। भारतीय संस्कृति में होली की परंपरा अत्यंत प्राचीन है और पौराणिक कथाएँ हमें बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती हैं। डॉ. गुप्ता ने होली पर आधारित एक भावपूर्ण कविता भी प्रस्तुत की, जिसमें प्रेम, सद्भाव और सम्मान के रंगों से समाज को जोड़ने का संदेश निहित था।