डेस्क: टी-20 विश्व कप (T20 World Cup) में भारत के खिलाफ मिली करारी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में उथल-पुथल तेज हो गई है। ICC Men’s T20 World Cup के मुकाबले में कोलंबो स्थित आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए मैच में भारतीय टीम ने 175/7 का स्कोर खड़ा किया, जबकि पाकिस्तान की पूरी टीम 114 रन पर सिमट गई।
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में उतरी भारतीय टीम की जीत ने मैदान पर दबदबा दिखाया, लेकिन इस हार के असर पाकिस्तान में खेल से आगे बढ़कर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों तक महसूस किए जा रहे हैं।
शोएब अख्तर का तीखा हमला
पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने बोर्ड प्रबंधन को “अक्षम और हालात से अनजान” बताते हुए टीम की तैयारी और रणनीति पर नाराजगी जताई।
चेयरमैन की कुर्सी पर संकट?
वर्तमान में मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम की लगातार खराब प्रदर्शन के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं और कुछ हलकों में उन्हें हटाने की मांग भी उठने लगी है।
सेना प्रमुख की नाराजगी की चर्चा
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि आसिम मुनीर टीम की हार और क्रिकेट प्रशासन की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने मामले को लेकर शहबाज शरीफ तक संदेश भिजवाया, जिसमें टीम की तैयारी, प्रबंधन और बयानों को लेकर चिंता जताई गई।
बयान बना विवाद की वजह
बताया जा रहा है कि मैच से पहले नकवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख का नाम लेते हुए आक्रामक टिप्पणी की थी, जिसे बाद में कई लोगों ने संस्थागत मर्यादा के विपरीत बताया। मैच के दौरान उनकी स्टेडियम से बीच में ही वापसी ने भी आलोचनाओं को और हवा दी।
‘सबसे अंधेरा दौर’-मोहम्मद यूसुफ
पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ ने मौजूदा स्थिति को पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास का “सबसे कठिन दौर” बताया। उन्होंने खेल में राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म करने और पेशेवर फैसलों की जरूरत पर जोर दिया।
हार से खुली व्यवस्थागत खामियां
इस हार ने केवल टीम की बल्लेबाजी या रणनीति की कमजोरियां ही नहीं उजागर कीं, बल्कि प्रशासनिक फैसलों, चयन प्रक्रिया और क्रिकेट ढांचे पर भी बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में क्रिकेट अब महज खेल नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और सत्ता संरचनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है—जहां एक बड़ी हार पूरे सिस्टम को झकझोर देती है।
