डेस्क: रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच जारी युद्ध को लेकर मॉस्को ने कीव के सामने एक नई शर्त रखी है। रूसी नेतृत्व का कहना है कि यदि यूक्रेन में नए चुनाव कराने की घोषणा की जाती है, तो रूस हमले रोकने पर विचार कर सकता है। यह संकेत क्रेमलिन (kremlin) की ओर से आया, जिसने एक बार फिर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) की सरकार की वैधता पर सवाल उठाया है।
रूसी उप-विदेश मंत्री का बयान
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में उप-विदेश मंत्री मिखाइल गालुजिन ने कहा कि मौजूदा यूक्रेनी प्रशासन को मॉस्को वैध नहीं मानता।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही प्रस्ताव दे चुके हैं कि यूक्रेन के प्रशासनिक ढांचे को अस्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में दिया जाए।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का सुझाव
रूस ने सुझाव दिया है कि संयुक्त राष्ट्र के तहत एक विशेष समिति बनाई जाए, जो यूक्रेन में निष्पक्ष चुनाव आयोजित कराए और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया सुनिश्चित करे।
मॉस्को का कहना है कि ऐसी सरकार के साथ वह शांति समझौते और भविष्य के द्विपक्षीय सहयोग पर हस्ताक्षर करने को तैयार होगा।
“चुनाव होंगे तो हमले रुक सकते हैं”
गालुजिन के मुताबिक, यदि कीव राष्ट्रपति चुनाव कराने का निर्णय लेता है, तो रूस उसी समय हवाई हमले रोक सकता है।
रूस का दावा है कि उसने 2024 में अपने चुनाव युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी कराए थे और यूक्रेन को “संवैधानिक प्रक्रिया बहाल करने” की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
जेलेंस्की का रुख: युद्ध के बीच चुनाव संभव नहीं
यूक्रेनी नेतृत्व पहले ही कह चुका है कि सक्रिय युद्ध की स्थिति में चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है। जेलेंस्की का कहना है कि शांति बहाल होने के बाद ही लोकतांत्रिक चुनाव कराए जा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी जुड़ी
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मुद्दे पर पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं की ओर से सवाल उठाए गए थे, जिनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में रहा।
वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के प्रयास जारी बताए जाते हैं, हालांकि क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
लगातार हमलों के कारण यूक्रेन के ऊर्जा और नागरिक ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। ऐसे में रूस का यह प्रस्ताव युद्धविराम की संभावनाओं से जुड़ा नया संकेत माना जा रहा है, लेकिन कीव की प्रतिक्रिया और जमीनी हालात तय करेंगे कि यह पहल आगे बढ़ती है या नहीं।
