अंतरराष्ट्रीय

एपस्टीन कनेक्शन पर दुबई के बड़े कारोबारी का इस्तीफा, रशियन महिलाओं के साथ….

डेस्क: अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में दुबई के प्रमुख कारोबारी और लॉजिस्टिक्स दिग्गज DP World के चेयरमैन व सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलायम (Sultan Ahmed bin Sulayem) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन से कथित कारोबारी संपर्क और निजी बातचीत से जुड़े ईमेल सार्वजनिक होने के बाद उनके खिलाफ दबाव बढ़ गया था। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच संभावित व्यावसायिक अवसरों और महिलाओं को लेकर बातचीत के उल्लेख दस्तावेजों में सामने आए हैं।

वैश्विक निवेशकों ने रोका निवेश

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब दो बड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थानों—ब्रिटेन की एक विकास वित्त एजेंसी और कनाडा के एक बड़े पेंशन फंड—ने कंपनी में नए निवेश रोकने का फैसला किया। इसके बाद कंपनी के नेतृत्व में बदलाव की मांग तेज हो गई।

दुबई प्रशासन ने किया नेतृत्व परिवर्तन

सूत्रों के अनुसार दुबई प्रशासन ने तुरंत नई नियुक्तियों को मंजूरी दी। Esa Kazim को बोर्ड का नया चेयरमैन बनाया गया है। वह वर्तमान में Dubai International Financial Centre (DIFC) के गवर्नर हैं। वहीं कंपनी के लंबे समय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी को समूह का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।

कई देशों में फैला है कारोबार

डीपी वर्ल्ड का संचालन एशिया, यूरोप, कनाडा और भारत समेत कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। कंपनी का दावा है कि वैश्विक कंटेनर यातायात में उसकी हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है, जिससे यह दुनिया की सबसे प्रभावशाली पोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में गिनी जाती है।

ईमेल से बढ़ा विवाद

दस्तावेजों में सामने आए एक पुराने ईमेल में एपस्टीन ने बिन सुलायम से संपर्क करते हुए निजी बातचीत का जिक्र किया था। हालांकि, इन संदेशों का संदर्भ पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इन्हीं खुलासों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और सवाल उठने लगे।

पहले भी हो चुका था नाम उजागर

बताया जाता है कि शुरुआती दस्तावेजों में कारोबारी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी, लेकिन बाद की कानूनी कार्यवाही में नाम सामने आने के बाद विवाद तेज हो गया। रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिला कि एपस्टीन को सजा मिलने के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा था।

यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक कॉरपोरेट गवर्नेंस, निवेशकों की नैतिक अपेक्षाओं और बड़े बहुराष्ट्रीय समूहों की प्रतिष्ठा पर पड़ने वाले असर को लेकर नई बहस छिड़ गई है—खासतौर पर खाड़ी क्षेत्र की कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के दौर में।

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