डेस्क: आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान के लिए आतंकवाद अब खुद नासूर बन गया है। कुछ दिन पहले ही राजधानी इस्लामाबाद स्थित एक मस्जिद में बम ब्लास्ट की घटना सामने आई थी, जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए थे। लेकिन अब सवाल ये है कि इन घायलों का इलाज कौन करेगा? पाकिस्तानी डॉक्टर्स देश में रहना ही नहीं चाहते।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में 4,000 डॉक्टरों ने देश छोड़ दिया। यह डॉक्टरों का अब तक सबसे रिकॉर्ड तोड़ पलायन है।
रिपोर्ट में दावा
पाकिस्तान में पिछले साल डॉक्टरों के देश छोड़ने का रिकॉर्ड टूट गया। 2025 में करीब 3,800–4,000 डॉक्टर विदेश चले गए, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान का हेल्थ सिस्टम गंभीर संकट में है।
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों का विदेश जाना पिछले दस साल से बढ़ रहा था, लेकिन इस बार यह सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। हर साल पाकिस्तान में करीब 22,000 नए डॉक्टर बनते हैं और कुल 3.7 लाख डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं। कागज पर लगता है कि डॉक्टरों की संख्या ठीक है, लेकिन असलियत अलग है… कई डॉक्टर असल में काम ही नहीं कर रहे।
35 प्रतिशत महिला मेडिकल डॉक्टर काम नहीं करती; जानिए वजह?
सबसे बड़ी समस्या है… कमजोर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक दबाव, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में महिला डॉक्टर नौकरी नहीं कर पातीं। वह रात में काम नहीं कर सकती। बाहर नहीं जा सकती। 2023 के गैलप सर्वे के अनुसार, पाकिस्तान में 35 प्रतिशत महिला मेडिकल डॉक्टर काम नहीं करती हैं। नतीजा यह कि देश में डॉक्टरों की भारी कमी बनी रहती है और लोग इलाज के लिए तरसते हैं।
विदेशों का रुख का ये भी एक कारण
डॉक्टर अक्सर पाकिस्तान में आधुनिक मेडिकल उपकरणों, ट्रेनिंग के अवसरों और अच्छे माहौल की कमी से निराश महसूस करते हैं और विदेशों का रुख करते हैं, जहां का जीवन उन्हें आकर्षित करता है और जहां वे तकनीकी रूप से एडवांस्ड हेल्थकेयर इकोसिस्टम में प्रैक्टिस कर सकते हैं।
