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मैथिली केवल भाषा नहीं माता जानकी के सम्मान का प्रतीक भी, मोदी सरकार में मिला ऐतिहासिक सम्मान : डा गोपाल जी ठाकुर

23 वा अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का सांसद ने किया उद्घाटन, स्मारिका का किया विमोचन

दरभंगा। मैथिली के साढ़े करोड़ मिथिलावासियों की मातृ भाषा ही नहीं है बल्कि माता जानकी के सम्मान का प्रतीक भी है। यही कारण है माता जानकी को मैथिली के नाम से भी जाना जाता है। भाजपा तथा एनडीए सरकार में मैथिली भाषा को ऐतिहासिक सम्मान दिया गया जिसका ज्वलंत उदाहरण है इस भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना। न्यायिक कार्यों के साथ साथ सीबीएसई पाठ्यक्रम से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की सभी सरकारी कार्यालयों का मैथिली भाषा में वेबसाइट उपलब्ध कराकर मोदी सरकार ने मैथिली भाषा को ऐतिहासिक सम्मान मिला है। जरूरत इस बात की है कि हम सभी मिथिलावासी जाति धर्म तथा दलगत भावना से ऊपर उठकर मैथिली भाषा के संरक्षण संवर्धन तथा इसके उत्थान के लिए प्रयास करें, भारतीय जनता पार्टी के सांसद सह लोकसभा में पार्टी के सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने सीतामढी स्थित पुनौराधाम में आयोजित 23 वा अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उपरोक्त बातें कही। आयोजन समिति के द्वारा सांसद डा ठाकुर का मिथिला पेंटिंग तथा पाग,अंगवस्त्र से सम्मानित भी किया गया। सीतामढी के सांसद डा देवेश चंद्र ठाकुर की अध्यक्षता तथा मैथिली अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ कमला कांत झा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में सांसद डा ठाकुर ने कार्यक्रम के संरक्षक डॉ वैद्यनाथ चौधरी बैजू के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, डॉ संजय सरावगी सीतामढी के नगर विधायक सुनील कुमार पिंटू, शिवहर विधायक श्वेता गुप्ता, रीगा के विधायक रामनरेश प्रसाद बथनाहा के विधायक अनिल कुमार परिहार की विधायक गायत्री देवी पूर्व विधायक मिथिलेश कुमार, रामनरेश प्रसाद सहित अन्य जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मुख्य अतिथि के रूप में दीप जलाकर उद्घाटन किया, स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

सांसद डा ठाकुर ने तीन दर्जन से अधिक मिथिला मैथिली के क्षेत्र में सिद्धहस्त गणमान्य लोगों के बीच मिथिला रत्न, मिथिला विभूति सहित अन्य पुरस्कार भी वितरण किए।

कार्यक्रम में मिथिला क्षेत्र में मैथिली भाषा की अनिवार्यता पर जोर देते हुए सांसद डा ठाकुर ने कहा कि मैथिली भाषा का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। मैथिली भाषा की अपनी अलग लिपि तथा स्वतंत्र पहचान भी है यही कारण है कि मैथिली भाषा को श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेई से लेकर मोदी जी तक शासन में भाजपा तथा एनडीए सरकार ने काफी सम्मान मिला है। सांसद डा ठाकुर ने मैथिली भाषा के स्वर्णिम इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा आठ सौ ईo के आसपास से इसका लिपिय उल्लेख मिलता है तथा कालांतर में मैथिली भाषा बिहार और प्रवासी मैथिलजनों के कारण दिल्ली कोलकाता मुंबई जैसे महानताओं की जनभाषा बनी। सांसद डा ठाकुर मैथिली भाषा के सर्वांगीण विकास के लिए अपने प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि वे विधायक के रूप में भी मैथिली भाषा में शपथ ग्रहण किए थे तथा सांसद के रूप में भी लगातार मैथिली भाषा में शपथ लेने के साथ लोकसभा में मैथिली भाषा में ही अपनी बात रखते हैं। सांसद डा ठाकुर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मंच से आह्वान करते हुए कहा आज माता जानकी की इस भूमि से सभी संकल्पित हों कि मैथिली भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए पहल करेंगे।

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