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भिखारी ठाकुर जयंती पर लोकनाट्य और संगीत की सजी जीवंत पर प्रस्तुति

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग द्वारा महान संगीतज्ञ भिखारी ठाकुर की 138 वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भिखारीनामा का आयोजन किया। यह कार्यक्रम ललित कला संकाय के अंतर्गत संगीत एवं नाट्य विभाग के सत्र 2024–26 एवं 2025–27 के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य भिखारी ठाकुर के लोक-संगीत,नाटक, सामाजिक चेतना से जुड़े योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन एवं संरक्षण विभागाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ द्वारा किया गया।विश्वविद्यालय परिसर में इस आयोजन को लेकर छात्रों एवं कला प्रेमियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय अंतर्गत विश्वविद्यालय संगीत एवं नाटक विभाग द्वारा 18 दिसंबर को लोकनाटक सम्राट भिखारी ठाकुर की जयंती श्रद्धा एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाई गई। यह आयोजन भारतीय लोकसंस्कृति, लोकनाट्य एवं सामाजिक चेतना को समर्पित रहा। विभागाध्यक्ष लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’, मुख्य अतिथि डॉ. प्रियंका राय, पूर्व शिक्षक डाॅ वेद प्रकाश,डॉ. पुष्कर कुमार झा एवं डॉ. अभिषेक स्मिथ सहित द्वारा दीप जलाकर किया। छात्र व छात्राओ ने कुलगीत की प्रस्तुति के बाद डाॅ प्रियंका राय ने ऐसे आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत डाॅ वेद प्रकाश ने भिखारी ठाकुर के सामाजिक योगदान, लोकभाषा में अभिव्यक्ति और जनजीवन से जुड़े विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। छात्रों द्वारा भिखारी ठाकुर के कालजयी नाटक ‘विदेसिया’ के चयनित अंशों का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से प्रवासी जीवन की पीड़ा, नारी-संवेदना, सामाजिक विडंबनाओं और लोकजीवन की सच्चाइयों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। दर्शक नाटक के भावात्मक पक्ष से गहराई से जुड़े दिखाई दिए और मंचन को भरपूर सराहना मिली। नाट्य विभाग के प्रथम सेमेस्टर के छात्र – छात्राओं अपराजिता मिश्रा ,अंशु कुमार गुप्ता,त्रिलोकी पांडेय ,विजय कुमार शर्मा, विनोद कुमार विश्वकर्मा,आकाश कुमार,आदित्य आनंद,सज्जन कुमार, प्रिया कुमारी ,ज्योति कुमारी ,एकता कुमारी, प्रहलाद कुमार और नितेश कुमार वहीं तृतीय सेमेस्टर के छात्र – कृष्णा कुमार ,अमन कुमार ,पूजा कुमारी ,मृत्युंजय शर्मा, पिंटू कुमार तथा हरिश्चंद्र कुमार आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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