
दरभंगा। खानकाह आलिया समरकंदिया, रहमगंज में हर साल होने वाले शानदार और नायाब पिछले 131 सालो से होती हुई आ रही है। इस बार 132 वें उर्स पीर ए तरीकत रहबर ए शरियत आले रसूल सैयद शाह समसूलुल्लाह जान मिस्बाही बाबू हुजूर की सरपरस्ती में और इनकी दुआओ की बरकत से चार दिन तक चलने वाले बेहतरीन उर्स और जलसा अच्छी तरह से कामयाबी के साथ पूरी हो गई। साथ में इनके बड़े साहब जादे
हजरत मौलाना हाफिज व कारी सैयद शाह नुरुल अमीन की दुआओ की बरकत से उर्स कामयाब रहा, बाबू हुजूर ने कहा माशाअल्लाह बहुत अच्छा रहा। आज 27 अक्टूबर को भीखा शाह सैलानी मजार शरीफ पर पहुंचकर यह उर्स खत्म हो गया। सभी मेहमानों,उर्स कमिटी और जिला प्रशासन,समाजिक लोगो,मिडिया ने पूरा साथ दिया सभी लोगो का शुक्रिया जो अच्छी तरह से उर्स की कामयाबी के साथ पूरा हों गया। खानकाह से जुड़े सभी लोगो को उर्स की मोबारकबाद देते है। उर्स के तीसरे दिन दोपहर में जलसा और फिर शाम से शुरू हुई खास कार्यक्रम जलसे का शुरू हुई जो देर रात तक चलती रही। मौके पर खानकाह में पढ़ने वाले 30 बच्चों को उनकी कामयाबी के मौके पर बाबू हुजूर के हाथों दास्तारबंदी की गई और सभी को मुबारकबाद देते हुए दिन पर चलते हुए अपनी जिंदगी गुजारनी है और अल्लाह और उनके रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलकर खिदमत करनी है। भीका शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैहे के मजार पर दुआ से पहले नात पढ़ी गई और तकरीर भी सुनाई गई। मौलाना कारी शरीफ, मौलाना कारी इशहाक अंजुम, मौलाना नुरुल अमीन, मौलाना कारी तजममूल, और अपनी बेहतरीन तकरीर मौलाना मुफ्ती महफिल अशरफ ने अपनी बेहतरीन तकरीर सुनाया। हजरत मौलाना समरकंद रहमतुल्लाह अलैहे के मजार पर चादरपोशी और तबरुकात लोगो में बांटे गए। 132 वें उर्स को अपने खिदमत से कामयाबी दिलाने वालों में कमिटी सदस्यों और खानकह के लोगो की खास मेहनत लगी थी। उर्स कमिटी में मीडिया प्रभारी नाजिर खान, कार्यालय मैनेजर सैयद आफताब अशरफ, बाबू हुजूर के खादिम दरगाह, अकील आलम, और
खादिम दरगाह भीका शाह सैलानी र.अ. भाटियारीसराय, शाह मोहम्मद शमीम ने भी अपनी अहम खिदमत उर्स के मौके पर किया और वहा की जिम्मेदारी बहुत ही अच्छी तरह से निभाई गई. वही डॉ. मुन्ना खान ने यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी अपने हाथो में ले रखा था। वही कार्यक्रम स्टेज का संचालन,मौलाना अख्तर रजा मिस्वाही और मौलाना शमीम नूरी ने किया। मो शाहिद प्रवेज, शाहिद खान, सईद अशरफ, सादिक खान, फिरोज खान, सऊद खान, डॉ वजीह अहमद खा,मो मोतीउर रहमान,डॉ गुड्डू, डॉ बिजली,मो नासिर हुसैन,हुसैन मंसूरी रहे वही खानकाह के कार्यालय इंतेजामिया कमिटी में मो. महमूद अहमद, मो अख्तर हुसैन, मौलाना मो महदूद अहमद,मो याकूब,मो दब्बीर आलम, अकील आलम और मो मेहमूद अहमद शामिल थे। इसके बाद तबरूक के तौर पर लोगों में खिचड़ा बांटा गया और फिर बाहर से आने वाले जायरीन अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे।