
दरभंगा। हजरत मौलाना समरकंदी र. अ. के 132 वे उर्स के दूसरे दिन देर शाम शुरू हुई जलसा में देर रात तक उर्स कलाम पाक की तिलाबत मौलाना कारी मो तनवीर आलम ने पढ़कर शुरू की खानकाह स्मरकंदिया आलिया, रहमगंज में उर्स के जलसा की सदारत और सरपरस्ती हजरत मौलाना सैय्यद समसुल्लाह जान बाबू हुजूर ने किया। मौके पर बड़ी संख्या में जायरीन दरभंगा के अलावा पश्चिम बंगाल, दिल्ली, नेपाल, मुंबई, के अलावा और कई राज्यों से भी जायरीनो के पहुंचने का सिलसिला जारी है। हजारों हजार की संख्या में लोग उर्स में पहुंच रहे हैं। उर्स के मौके पर खाना, नास्ता,चाय, मिठाइयों, टोपी के दुकाने सजी है। उर्स के मौके पर जलसा में नात सुनाने वाले मौलाना कारी मो शरीफ आलम नूरी, ख़तिबूल हिन्द, वनारस से आलम सगीर रजा, मौलाना कारी मो इशहाक अंजुम, बंगाल के सोनापुर से आए मुफ़्ती मो महफ़िल अशरफ की तकरीर से माहौल से रूहानियत के माहौल में अल्लाह और रसूल की बातो को सुनने के बाद अमल करने को कहा और अपने बुजुर्गो से जुड़े रहना चाहिए। बाहर से आए हुए मौलानाओं के द्वारा तकरीर सुनाई गई। जिसमें पश्चिम बंगाल से मुफ्ती महफिल अशरफ बैंगलौर से मौलाना नासिर रजा खान और नातिया कलाम सुनाने वाले शायरों में गुजरात के सूरत से इस्लाम कारी शरीफ, जमशेदपुर से शहंशाह तरन्नुम कारी इशहाक, खास मेहमानों के आलावा कई मौलाना और शायरो ने कलाम अपनी बेहतरीन कलाम सुनाया।वही हजरत अल्लामा सैय्यद मो नुरुल अमीन द्वारा जलसा के आख़री में कुल पढ़ी गई और बाबू हुजूर के दुआ के साथ कार्यक्रम खत्म हुई। जलसे में संचालन मौलाना अख्तर रामौलाना अख्तर रजा मिस्वाही और मौलाना समीम नूरी के द्वारा किया गया। और उर्स की कामयाबी में अहम किरदार तमाम उर्स के इंजेजामिया कमिटी के द्वारा अहम रोल निभाया गया। यह जानकारी देते हुए उर्स के मिडिया प्रभारी नादिर खान एवं सैयद आफताब अशरफ ने बताया की उर्स के तीसरे दिन रविवार को खानकाह स्मरकंदिया में पढ़ने वाले बच्चों की कामयाबी हासिल करने पर जलसा के मौके पर कामयाब होने वाले 30 बच्चों की दास्तारबंदी होगी। जिसमे 15 बच्चे, 12 बच्चों ने फाजिल और 3 बच्चों ने कारी में कामयाबी हासिल किया। निकालना है सभी सुबह में आएगी बच्चों की दास्तारबंदी बाबू हुजूर के हाथों की जाएगी। इस मौके पर खानकाह स्मरकंदिया के शिक्षको में मौलाना राजोल मुस्तफा मिस्बाही, मौलाना अलहाज अब्दुल अल्लाम मिस्बाही,मौलाना अख्तर राजा मिस्बाही,मौलाना फूल मो मिस्बाही, मौलाना कारी नसीम, मौलाना कारी इमाम हसन, मौलाना अफफ़ान अजहरी, मौलाना उस्मान मिस्बाही, मौलाना कारी अब्दुल अहद, मौलाना कारी अनवर, मौलाना तनवीर, मौलाना शादाब, मौलाना मास्टर शब्बीर, मौलाना कारी अबूजर के अलावा और दीगर हजरत इस मौके पर मौजूद रहे।