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Kashmir में सटीक खुफिया जानकारी के लिए सुरक्षाबलों को गुज्जर-बकरवालों का भरोसा फिर से जीतना होगा

डेस्क :आतंकवादी समूहों की ओर से अब रणनीति में बदलाव करते हुए ऊंची चोटियों को सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल किये जाने के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों, विशेषकर सेना के लिए अब समय आ गया है कि वह अपनी रणनीति की समीक्षा करें और गुज्जर तथा बकरवाल खानाबदोश जनजातियों का विश्वास फिर से हासिल करें। इन जनजातियों के बारे में माना जाता है कि ये पहाड़ों की “आंख और कान” हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों और दोनों समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है जिससे सीमा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाने में खतरा पैदा हो सकता है

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