दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना स्नातकोत्तर इकाई द्वारा हिंदी दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्नातकोत्तर व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. दयानाथ झा ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि आज का दिन विशेष है, क्योंकि हिंदी दिवस और जीवित्पुत्रिका व्रत दोनों एक साथ पड़े हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की दीर्घायु हेतु किया जाता है, उसी प्रकार संस्कृत भी हिंदी की ‘जननी’ है, और हिंदी उसकी संतान। संस्कृत के संरक्षण से ही हिंदी का संरक्षण संभव है और हिंदी के संरक्षण से संस्कृत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के शोध परियोजना अध्येता डॉक्टर अशोक चंद्र गोड शास्त्री ने “भाषा विज्ञान में संस्कृत और हिंदी की भूमिका” पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
ज्योतिष विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम निहोरा राय ने अपने वक्तव्य में हिंदी भाषा को हमारी सनातन परंपराओं का दर्पण बताया। सहायक आचार्य डॉ. एल सविता आर्या ने कहा कि “हिंदी” शब्द ‘सिंधू’ से बना है, और इसी हिंदी भाषा से ‘हिंदुस्तान’ नाम प्रचलित हुआ। हिंदी हमारी पहचान है, विदेशों में भी हमें हमारी मातृभाषा हिंदी से ही पहचाना जाता है।
डॉ. अवधेश कुमार श्रोत्रिय ने अपनी स्वरचित कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसी क्रम में डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री ने भी हिंदी और संस्कृत पर अपनी भावपूर्ण पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं। सहायक आचार्य ऋद्धि रमण झा , शोध छात्र अमित कुमार सहित अन्य शोधार्थियों ने भी अपनी-अपनी रचनाएँ एवं विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर कुमार झा के निर्देशन में स्नातकोत्तर इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. साधना शर्मा ने संचालन किया। कार्यक्रम का संचालन के दौरान उन्होंने भी हिंदी की महिमा पर काव्य-पंक्तियाँ सुनाकर वातावरण को ऊर्जावान बनाया।
