डेस्क : मराठा आरक्षण को लेकर चल रहा विवाद बुधवार को उस समय और गहरा गया, जब वरिष्ठ एनसीपी नेता और मंत्री छगन भुजबल ने सरकार के इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की. सूत्रों के अनुसार, भुजबल ने साह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित राज्य कैबिनेट बैठक से वॉकआउट कर लिया, जिससे उनकी नाराजगी पूरी तरह से सामने आ गई.
जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट बैठक से पहले साह्याद्री गेस्ट हाउस में एनसीपी मंत्रियों की एक प्री-कैबिनेट चर्चा हुई, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी मौजूद थे. इस चर्चा के दौरान भुजबल ने पवार से सवाल किया कि मराठा आरक्षण पर निर्णय लेने से पहले उनसे सलाह क्यों नहीं ली गई. जवाब में, पवार ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लिया था और उन्होंने आश्वासन दिया कि इससे ओबीसी आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, भुजबल ने जोर देकर कहा कि उन्हें और उनके समुदाय के नेताओं को विश्वास में लिया जाना चाहिए था.
इस चर्चा के बाद, नाराज भुजबल ने निजी कारणों का हवाला देते हुए मुख्य कैबिनेट बैठक में शामिल न होने का फैसला किया और बैठक शुरू होने से ठीक पहले वहां से चले गए. उनके इस कदम को उनकी नाराजगी का सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है.
गौरतलब है कि भुजबल पहले से ही मराठा आरक्षण पर जारी सरकारी आदेश (जीआर) से नाखुश थे. प्री-कैबिनेट सत्र में शामिल होने और फिर कैबिनेट बैठक शुरू होने से पहले वॉकआउट करने का उनका निर्णय उनकी नाराजगी को खुले तौर पर जाहिर करने का एक प्रतीकात्मक कदम था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार शाम को कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मुंबई में अपनी पांच दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी, जब देवेंद्र फडणवीस सरकार ने उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया। इन मांगों में पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों को कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है, जिससे वे ओबीसी श्रेणी के तहत मिलने वाले आरक्षण लाभों के लिए पात्र हो जाएंगे.
महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि मराठा समुदाय के उन सदस्यों को कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी, जिनके पास अपनी कुणबी विरासत का ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद है. कुणबी महाराष्ट्र में एक पारंपरिक कृषक समुदाय है, जिसे ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है ताकि वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो सकें. सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश में हैदराबाद गजट के कार्यान्वयन का भी उल्लेख किया गया है.
