अंतरराष्ट्रीय

दुनिया के पहले खरबपति बने एलन मस्क!

डेस्क: दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन एलन मस्क (Elon Musk) अब दुनिया के इकलौते ट्रिलियनेयर बन चुके हैं. मस्क की रॉकेट कंपनी SpaceX शुक्रवार (12 जून 2026) को अमेरिकी शेयर मार्केट नैस्डैक (Nasdaq) पर लिस्टेड हुई. 1.77 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर हुई इस लिस्टिंग के बाद मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर(खरबपति) बन गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक मस्क की नेटवर्थ करीब 982 बिलियन डॉलर यानी 93.63 लाख करोड़ रुपये थी. स्पेसएक्स के IPO का शेयर चढ़ा और मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर हो गई. भारतीय करेंसी में ये रकम करीब 95.35 लाख करोड़ रुपये हुई. यानी एलन मस्क के पास इतनी दौलत है कि अगर वो हर घंटे 10 करोड़ रुपये भी खर्च करें, तो पूरी रकम खर्च करने में 144 साल लग जाएंगे.

 

ऑक्सफैम और संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक, 1 ट्रिलियन डॉलर की रकम से पूरी दुनिया से भूखमरी और गरीबी को कई सालों के लिए खत्म किया जा सकता है. आइए जानते हैं मस्क इतनी रकम से दुनिया की भलाई के लिए क्या-क्या कर सकते हैं:-

 

कितनी बढ़ी है 1 ट्रिलियन डॉलर की रकम?

 

1 ट्रिलियन डॉलर दुनिया के 174 देशों की GDP से भी बड़ी है. दुनिया के केवल 20 देश ऐसे हैं, जिनकी GDP मस्क की दौलत से ज्यादा है. फोर्ब्स की रिपोर्ट कहती है कि एलन मस्क इतनी दौलत के साथ ताइवान, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे अमीर देशों की इकोनॉमी से ज्यादा अमीर बन चुके हैं.

 

अगर पूरी दुनिया में बांट दें अपनी दौलत तो?

 

मौजूदा समय में दुनिया की आबादी लगभग 8.29 अरब है. अगर एलन मस्क अपनी पूरी संपत्ति दुनिया के हर व्यक्ति में बराबर-बराबर बांट दें, तो हर शख्स को करीब 121 डॉलर यानी लगभग 11,500 रुपये मिलेंगे. बता दें कि मस्क ने अपनी आधी दौलत दान करने का फैसला किया है.

 

क्या इससे गरीबी खत्म हो जाएगी?

 

नहीं. सुनने में 121 डॉलर बड़ी लग सकती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इतनी राशि किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को लंबे समय तक नहीं बदल सकती. अधिकांश देशों में यह रकम कुछ दिनों या कुछ हफ्तों के खर्च से ज्यादा नहीं होगी. यानी पूरी दुनिया में मस्क अगर अपनी दौलत बराबर बांट भी दें, तो गरीबी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा. हां, कुछ सालों के लिए गरीबी को कम  जरूर किया जा सकता है.

 

दुनिया में अभी कितनी गरीबी?

 

वर्ल्ड बैंक के 2025 के डेटा के मुताबिक, दुनिया में करीब 70 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो अत्यधिक गरीबी में जिंदगी काट रहे हैं. ये वो आबादी है, जो अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी संघर्ष करती है. इस हिसाब से अगर मस्क अपनी पूरी ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति सिर्फ इन्हीं 70 करोड़ लोगों के बीच बांट दें, तो प्रत्येक व्यक्ति को लगभग 1,430 डॉलर मिल सकते हैं. भारतीय करेंसी में कंवर्ट करें, तो ये रकम करीब 1.2 लाख रुपये के बराबर बैठती है. ये रकम निश्चित रूप से गरीब परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है. उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकती है. लेकिन, पूरी तरह से गरीबी खत्म नहीं हो सकती.

 

भूखमरी खत्म हो सकती है?

 

संयुक्त राष्ट्र की कई रिपोर्टें बताती हैं कि दुनिया में भूखमरी की समस्या सिर्फ पैसों की कमी की वजह से नहीं है. इसके पीछे युद्ध, जलवायु परिवर्तन, खराब वितरण प्रणाली, राजनीतिक अस्थिरता और खाद्य आपूर्ति में बाधाएं भी बड़ी वजह हैं. यानी अगर किसी एक व्यक्ति की संपत्ति का इस्तेमाल किया भी जाए, तो वह कुछ समय के लिए राहत जरूर दे सकती है, लेकिन भूखमरी की जड़ में मौजूद समस्याओं को खत्म नहीं कर सकती.

 

 

मस्क अपने पैसों से दुनिया की भलाई कैसे कर सकते हैं?

 

अगर एलन मस्क अपनी संपत्ति का इस्तेमाल सिर्फ दान के बजाय लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन में खपाए, तो दुनिया का भला कर सकते हैं. इसे हम थियोरिटिकली कुछ बातों से समझने की कोशिश करते हैं:-

 

  • मस्क अगर अपने पैसों से कुछ गरीब देशों में फूड डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क बना दें, तो गरीबों को 2 वक्त का भरपेट खाना मिलेगा.
  • वो यूनाइटेड नेशंस के फूड प्रोग्राम को बड़े पैमाने पर फंडिंग दे सकते हैं.
  • दुनिया के गरीब देशों में लाखों स्कूल बनवा सकते हैं.
  • मुफ्त ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म शुरू कर सकते हैं.
  • साइंस, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप ऑफर कर सकते हैं.
  • गरीब देशों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ फेसिलिटी शुरू कर सकते हैं.
  • कैंसर, अल्जाइमर और अन्य गंभीर बीमारियों पर रिसर्च में निवेश कर सकते हैं.
  • जल संकट वाले देशों में बड़े पैमाने पर पाइपलाइन प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं.
  • सोलर और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट को बढ़ावा दे सकते हैं.
  • Starlink जैसी सेवाओं के जरिए दूरदराज क्षेत्रों को इंटरनेट से जोड़ सकते हैं.
  • विकासशील देशों में नई फैक्ट्रियां और टेक्नोलॉजी हब स्थापित कर सकते हैं.
  • AI और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नौकरियां पैदा कर सकते हैं.

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