डेस्क : गैंगस्टर मैनपाल बादली को कंबोडिया से प्रत्यर्पित कर बुधवार सुबह दिल्ली लाया गया। यहां पहुंचते ही हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। बादली पर सात लाख रुपये का इनाम था और वह वर्ष 2018 में पैरोल पर बाहर आने के बाद से फरार चल रहा था। एसटीएफ के मुताबिक, मैनपाल बादली लंबे समय से विदेश में रहकर अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था। उस पर हत्या, रंगदारी और कई गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। इंटरपोल की सहायता से कंबोडिया में उसकी गिरफ्तारी की गई थी और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे भारत भेजा गया।
साल 2018 में पैरोल पर रिहा होने के बाद मैनपाल बादली जेल लौटने के बजाय फरार हो गया था। तब से एसटीएफ लगातार उसकी तलाश कर रही थी। अब गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है ताकि उसके गिरोह के अन्य सदस्यों और आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर मैनपाल बादली पर सात लाख रुपये का इनाम घोषित था। करीब दस दिन पहले कंबोडिया में पकड़े जाने के बाद केंद्रीय एजेंसियों और हरियाणा STF की संयुक्त टीम ने गुप्त अभियान के तहत उसे अपने कब्जे में लिया।
अब उसे रोहतक जेल भेजा गया है, जहां उससे गहन पूछताछ की जाएगी। उसकी गिरफ्तारी ने अपराध जगत में खलबली मचा दी है, क्योंकि मैनपाल लंबे समय से विदेश में रहकर अपने गैंग को संचालित कर रहा था। मैनपाल का जन्म हरियाणा के बादली गांव में एक साधारण परिवार में हुआ। शुरुआती दिनों में वह ट्रैक्टर रिपेयर का काम सीख रहा था और एक मैकेनिक के रूप में जीवन यापन कर रहा था। लेकिन साल 2000 में चाचा की हत्या ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी। बदले की आग में उसने अपराध की राह पकड़ ली और कई हत्याओं को अंजाम दिया।
धीरे-धीरे मैनपाल हरियाणा के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में शामिल हो गया। उसके गैंग पर हत्या, फिरौती, आपराधिक साजिश और संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोप हैं। हैरानी की बात यह है कि जेल में रहते हुए भी उस पर हत्या का आरोप लगा, जिससे उसके नेटवर्क की गहरी जड़ें सामने आईं। हरियाणा पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में वह सबसे ऊपर था और 2018 में पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार हो गया। इसके बाद वह भारत छोड़कर कंबोडिया भाग गया, जहां से वह रिमोट कंट्रोल के जरिए अपने गैंग को निर्देश देता रहा। उसी के आदेश पर हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में गैंगवार और हत्याओं जैसी कई वारदातें हुईं।
पुलिस का कहना है कि मैनपाल का गिरोह नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के धंधे में सक्रिय था। उसकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए हरियाणा एसटीएफ ने इंटरपोल और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय किया। 20 अगस्त के करीब कंबोडिया पुलिस ने उसे पकड़ लिया और अब उसे भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हरियाणा पुलिस महानिदेशक हंस मोहन खीचड़ ने मैनपाल की गिरफ्तारी को ऐतिहासिक करार दिया। उनके अनुसार यह उपलब्धि अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट संकेत है। मैनपाल जैसे वांछित अपराधी की गिरफ्तारी न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि अन्य गिरोहों के लिए भी यह सख्त संदेश है।
