बोले- कौशलाधारित शिक्षण के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित होना आवश्यक
शैक्षिक सत्र 2025-27 का हुआ वर्गारम्भ
नूतन प्रविष्ट छात्रों को दस दिवसीय संस्कृत सम्भाषण प्रशिक्षण के माध्यम से संस्कृत बोलने का कराया जाएगा अभ्यास
दरभंगा : जीवन में प्रशिक्षण की महती भूमिका होती है । शिक्षा के क्षेत्र में निरन्तर परिवर्तन हो रहा है । प्रशिक्षण के द्वारा शिक्षक को नवीनतम तकनीक, डिजिटल माध्यम और शैक्षिक नवाचारों का परिचय कराया जाता है । प्रशिक्षित शिक्षक ही जागरूक नागरिकों और जिम्मेदार व्यक्तित्वों का निर्माण कर सकता है । ये बातें अपने वर्गारम्भ कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्वोधन में शिक्षाशास्त्र विभाग के निदेशक डॉ. घनश्याम मिश्र ने कही।
मंगलवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित बहुद्देश्यीय सभा भवन में शैक्षिक सत्र 2025-27 में नूतन प्रविष्ट शिक्षाशास्त्री ( बीएड) छात्रों का वर्गारम्भ किया गया । विभागीय प्राध्यापकों एवं निर्देशक द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यरम्भ का विधिवत् शुरुआत की गई । अपने स्वागत उद्वोधन में शिक्षाशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ.रामसेवक झा ने कहा कि प्राच्य विद्या के संरक्षण में स्थापित इस संस्कृत विश्वविद्यालय का अपना गौरवमयी इतिहास रहा है । आप सभी छात्र भाग्यशाली है जो आपका चयन शिक्षाशास्त्र विभाग में हुआ है । यहां छात्र बीएड प्रशिक्षण के अलावा नैतिक मूल्यों,अनुशासन एवं आदर्श आचरण का ज्ञान हासिल कर सकेंगे ।
वहीं डॉ.रामनंदन झा ने कहा कि विद्यार्थी की मानसिक अवस्था,रुचि, क्षमता और व्यवहार को जाने के लिए प्रशिक्षण का होना आवश्यक है । वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षा मनोवैज्ञानिक आधित हो गया है । शिक्षक छात्रों की मानसिक अवस्था काअवलोकन कर पाठ का प्रवर्धन करते है ।
वर्गारम्भ कार्यक्रम को विभागीय प्राध्यापिका डॉ.प्रीति रानी, प्राध्यपक कुन्दन कुमार, संजीव कुमार , अवन कुमार राय , गोपाल कुमार महतो आदि ने संबोधित करते हुए छात्रों को नियमित कक्ष में उपस्थित रहकर प्रशिक्षण प्राप्त कर कौशाधारित शिक्षा पर बल दिया । कार्यक्रम का संचालन प्राध्यापिक डॉ.निशा ने किया । उल्लेखनीय है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा के तहत अभी तक शिक्षाशास्त्र विभाग में 88 छात्रों का दाखिला हो चुका है ।
