नई दिल्ली : दिल्ली के पश्चिम विहार पुलिस स्टेशन में तैनात सब-इंस्पेक्टर नीतू बिष्ट को सतर्कता (विजिलेंस) विभाग की टीम ने 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक व्यापारी डॉ. नीरज से उगाही के मामले में की गई, जिसमें नीतू बिष्ट के साथ हेड कांस्टेबल विशाल छिल्लर और कांस्टेबल प्रमोद भी शामिल थे। इस घटना ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, हेड कांस्टेबल विशाल छिल्लर और कांस्टेबल प्रमोद ने व्यापारी डॉ. नीरज का अपहरण किया और उसे एक झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने नीरज से 50 लाख रुपये की मांग की थी, ताकि उसे रिहा किया जा सके। बाद में, अजीत और अजय कश्यप नाम के दो व्यक्तियों के हस्तक्षेप से यह सौदा 40 लाख रुपये में तय हुआ। नीरज ने 20 लाख रुपये का भुगतान कर दिया, जिसके बाद उसे रिहा किया गया। इस पूरी साजिश में सब-इंस्पेक्टर नीतू बिष्ट, जो उस समय छुट्टी पर थीं, फोन के जरिए ऑपरेशन को संचालित कर रही थीं।
विजिलेंस विभाग को इस मामले की शिकायत मिलने के बाद एक जाल बिछाया गया, और नीतू बिष्ट को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ा गया। फिलहाल, नीतू बिष्ट से पूछताछ जारी है, और विजिलेंस टीम यह जांच कर रही है कि इस भ्रष्टाचार में अन्य पुलिस अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं या नहीं।
इस मामले में पश्चिम विहार पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) राधेश्याम की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस विभाग इस बात की तहकीकात कर रहा है कि क्या इस उगाही के रैकेट में वरिष्ठ अधिकारियों की भी संलिप्तता थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम विहार थाने में केस दर्ज कर लिया गया है, और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
विजिलेंस की कार्रवाई: विजिलेंस विभाग ने नीतू बिष्ट को हिरासत में ले लिया है, और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। हेड कांस्टेबल विशाल छिल्लर और कांस्टेबल प्रमोद की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि क्या इस मामले में कोई और पुलिसकर्मी या बाहरी व्यक्ति शामिल था। अजीत और अजय कश्यप की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
