दरभंगा (निशांत झा) : सहस्त्र चण्डी महायज्ञ का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस महायज्ञ में वैदिक ब्राह्मण द्वारा दुर्गासप्तशती के एक हजार पाठों का आयोजन होता है। यह यज्ञ जगत की शान्ति और आध्यात्मिक प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह यज्ञ विश्व एवं मानव जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने हेतु किया जाता है। इस यज्ञ के माध्यम से समस्त जीवात्माओं के लिये मंगलकारी वातावरण, आत्मिक शांति का अनुभव होता है। सहस्त्र चण्डी महायज्ञ वेदों की शक्ति, उपनिषदों, पुराणों एवं तंत्रों का सम्मिलन है। “चण्डीपाठ” की प्रक्रिया से देवी महात्म्य का गुणगान होता है। यह सम्पूर्ण विश्व के लिये समर्पण, भक्ति, और प्रगति के पथ का प्रतीक है।
प्रकृति के समस्त तत्वों को भी यह महायज्ञ संतुलित करता है। गृहकल्याणी, महाकालिका, महासरस्वती के विभिन्न रूपों की साधना इस महायज्ञ में ज्ञानार्जन के रूप में सम्पन्न किया जाता है। कुल मिलाकर इस महायज्ञ महायज्ञ से अध्यात्मिक और भौतिक जीवन की समस्याओं से मुक्ति के साथ जीवन के सुख और शांति का अनुभव होता है और एक आदर्श परंपरा सृजित होती है। यह एक अद्भुत परंपरा है, जिसमें देवी भगवती की उपासना की जाती है। इन्हें प्रसन्न करने हेतु वे अपने कर्मों के अनुसार पृथ्वी में आध्यात्म देवी शक्ति के रूप में निवास करती हैं।
इस सहस्त्र चण्डी महायज्ञ के अवसर पर “दुर्गति नाशिनी प्रपन्नजन पालिनी” मां भगवती के श्रीचरणों में कोटि-कोटि आस्था एवं समर्पण।
धार्मिक दृष्टिकोण, उल्लास एवं फलदायक में अत्यंत शुभ जीवन की प्राप्ति होती है।
इस सहस्त्र चण्डी महायज्ञ में वैदिक विद्वानों द्वारा एवं भगवती दुर्गा की अहेतुकी कृपा से फलप्रदायक की आयोजन किया जा रहा है।
पं. श्री आचार्य अमरनाथ ठाकुर के नेतृत्व में समस्त ननौर ग्रामवासी एवं पं. लूटन झा की सहभागिता से आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आषाढ़ पूर्णिमा तक सहस्त्र चण्डी यज्ञ का आयोजन बाबा वैद्यनाथ धाम में किया जा रहा है।
