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दिवाली सिर्फ श्रीराम के अयोध्या लौटने का पर्व नहीं, इन 3 पौराणिक घटनाओं से भी जुड़ा है दीपों का त्योहार

डेस्क: दिवाली का नाम आते ही मन में भगवान श्रीराम, माता सीता और अयोध्या की जगमगाती गलियों की तस्वीर सामने आ जाती है। मान्यता है कि 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे, तब उनके स्वागत में पूरी नगरी को दीपों से रोशन किया गया था। यही वजह है कि हर साल कार्तिक अमावस्या को दीपावली का त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली का संबंध सिर्फ रामायण की इस घटना से नहीं है? पौराणिक कथाओं में इस त्योहार से जुड़ी तीन ऐसी घटनाओं का जिक्र मिलता है, जो बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश देती हैं।

भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की खुशी में जले थे दीप
दिवाली से जुड़ी सबसे प्रचलित मान्यता रामायण काल की है। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल का वनवास पूरा किया था। इस दौरान उन्होंने रावण का वध करके अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया। जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तो वहां के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। उनके स्वागत के लिए पूरी अयोध्या को दीपों से सजाया गया। अमावस्या की अंधेरी रात हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। तभी से इस दिन दीप जलाने और खुशियां मनाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।

भगवान कृष्ण और सत्यभामा ने किया था नरकासुर का वध
दिवाली से जुड़ी दूसरी पौराणिक कथा द्वापर युग की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर लोगों को परेशान करता था। उसने हजारों स्त्रियों को बंदी बना रखा था और अपनी ताकत के दम पर चारों तरफ आतंक फैला रखा था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया और उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई। इस जीत की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं मां लक्ष्मी
दिवाली से जुड़ी तीसरी मान्यता समुद्र मंथन की कथा से संबंधित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इसी मंथन के दौरान कई दिव्य रत्नों और वस्तुओं के साथ मां लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं। धार्मिक मान्यता है कि माता लक्ष्मी के प्रकट होने से संसार में सुख, समृद्धि और खुशहाली का संदेश फैला। इसी वजह से कार्तिक अमावस्या पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। लोग अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं, दीप जलाते हैं और माता से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
दिवाली पर दीप जलाने का क्या है खास महत्व
दिवाली पर दीप जलाना केवल घर को सजाने की परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश भी छिपा है। दीपक की रोशनी अज्ञानता, नकारात्मकता और बुराई को दूर करके ज्ञान, अच्छाई और सकारात्मकता की ओर बढ़ने का प्रतीक मानी जाती है। भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी धर्म की जीत का संदेश देती है, भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा की नरकासुर पर विजय अत्याचार के अंत को दर्शाती है और समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्रकट होना सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इसलिए इस दिवाली जब भी आप अपने घर में दीपक जलाएं, तो उसके पीछे छिपे इन पौराणिक प्रसंगों को भी याद करें। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो, अच्छाई और उम्मीद की एक छोटी-सी रोशनी भी उसे दूर कर सकती है।

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