डेस्क: दिवाली के बड़े कारोबारी सीजन से ठीक पहले तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में मुर्गी पालन से जुड़े किसानों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिले के कई गांवों के पोल्ट्री फार्मों में फैली एक अज्ञात और रहस्यमयी बीमारी के चलते पिछले छह दिनों के भीतर करीब 50,000 मुर्गियों की मौत हो चुकी है। इस अचानक आई त्रासदी के कारण प्रभावित फार्मों में बड़े पैमाने पर पक्षियों को दफनाने और नष्ट (Culling) करने की प्रक्रिया जारी है, जिससे किसानों को लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
टांगें खींचकर और पंख फैलाकर दम तोड़ रही हैं मुर्गियां
प्रभावित किसानों ने मुर्गियों की मौत के बेहद चिंताजनक लक्षणों का खुलासा किया है। किसानों के अनुसार, मुर्गियां अपनी टांगों को पीछे की ओर खींचकर और पंखों को पूरी तरह फैलाकर तड़पते हुए दम तोड़ रही हैं। बीमारी के सटीक कारणों का स्पष्ट पता न चलने के कारण आसपास के पोल्ट्री फार्म मालिकों में भी भारी दहशत और चिंता का माहौल बना हुआ है।
प्रशासन का अनुमान 26 हजार मौतें; बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं
मुर्गियों की सामूहिक मौत के आंकड़ों को लेकर प्रशासन और किसानों के दावों में अंतर देखा जा रहा है। जहां किसानों का कहना है कि पूरे जिले में 40,000 से 50,000 मुर्गियों की जान जा चुकी है, वहीं जिला प्रशासन के अनुसार यह आंकड़ा लगभग 26,000 के आसपास है।
मामले की गम्भीरता को देखते हुए जब शुरुआती लैब जांच कराई गई, तो उसमें ‘एवियन इन्फ्लूएंजा’ (बर्ड फ्लू) की आशंका को खारिज कर दिया गया है। हालांकि, बीमारी के असली कारणों का पता लगाने के लिए तमिलनाडु सरकार ने मुर्गियों के अतिरिक्त सैंपल जांच हेतु भोपाल स्थित प्रयोगशाला (Bhopal Laboratory) भेजे हैं।
’40-50 लाख का निवेश डूबा, दिवाली से ठीक पहले टूटी उम्मीदें’
कुड्डालोर जिले के पोल्ट्री किसान मोहन, जिन्होंने अकेले पिछले एक हफ्ते में 7,000 पक्षियों को खो दिया है, ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि एक चूजे की कीमत करीब 47-48 रुपये, 50 किलो दाने (फीड) की बोरी 2,500 से 2,600 रुपये और बिजली का बिल 10,000 से 20,000 रुपये तक आता है।
उन्होंने बताया, “हमने 40 से 50 लाख रुपये का निवेश किया था, लेकिन सब बर्बाद हो गया। हम बेबस बैठे हैं और समझ नहीं आ रहा कि इस नुकसान से कैसे उबरें”। किसानों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों और डॉक्टरों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें अभी तक कोई तत्काल राहत नहीं मिली है, केवल भोपाल से जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करने को कहा जा रहा है। दीपावली के मुख्य सीजन में हुए इस भारी नुकसान से उबरना किसानों के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।


