डेस्क: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ खास उपाय करने से घर में सकारात्मकता, सुख-शांति और समृद्धि का माहौल बना रहता है। इस दिवाली आप अपना सोया हुआ भाग्य जगाना चाहते हैं तो आप लक्ष्मी जी की पूजा के दौरान श्री सूक्त का पाठ जरूर करें। साल भर माता रानी धन की दौलत बरसाएगी।
श्री सूक्त का पाठ
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।
तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।
अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् ।
श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।
कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।
तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।
आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः ।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।
उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।।
गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि ।
पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।
कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।
इन उपायों से मां लक्षमी को करें प्रसन्न
मां लक्ष्मी को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। इसलिए दिवाली की पूजा में मां को कमल का फूल जरूर अर्पित करें। कुछ पारंपरिक मान्यताओं में दिवाली की पूजा के बाद सुपारी को लाल कपड़े में बांधकर धन रखने की जगह पर रखने का उपाय बताया जाता है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दक्षिणावर्ती शंख को हिंदू परंपरा में शुभ माना जाता है। यदि आपके परिवार में इसे पूजा में रखने की परंपरा है, तो दिवाली के दिन इसे साफ करके पूजा स्थल पर रखा जा सकता है।


