राष्ट्रीय

बैंक में ID-Password का हुआ गलत इस्तेमाल – ग्राहकों के खातों से 3 साल तक उड़ाए करोड़ों रुपये- PNB की महिला कर्मचारी गिरफ्तार

डेस्क: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ग्रेटर नोएडा स्थित पी सेक्टर शाखा में तैनात पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की एक कार्यालय सहायक और एक निजी व्यक्ति को 10.24 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। एजेंसी को संदेह है कि लगभग तीन वर्षों में अनधिकृत डेबिट लेनदेन के माध्यम से कई ग्राहक खातों से धनराशि निकाली गई। पीएनबी शाखा में कार्यालय सहायक या उप-कर्मचारी दीपांशी और निजी व्यक्ति आशुतोष कुमार पाठक को मंगलवार, 3 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।

इस फर्जीड़े का खुलासा कैसे हुआ?
बैंक की शिकायत के अनुसार, कथित धोखाधड़ी का खुलासा 16 सितंबर को हुआ, जब एक खाताधारक ने अपने खाते में तीन संदिग्ध डेबिट लेनदेन के बारे में शाखा प्रमुख से संपर्क किया। पीएनबी ने बताया कि उसने बाद में विभिन्न ग्राहक खातों से 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत डेबिट राशि की पहचान की। आरोप है कि यह पैसा पिछले तीन वर्षों में निकाला गया था। बैंक की शिकायत, जो अब सीबीआई की एफआईआर का हिस्सा है, में कहा गया है कि कथित धोखाधड़ी में शामिल सटीक राशि का पता लगाने के लिए शाखा में मिलान प्रक्रिया चल रही थी।
जब शाखा प्रमुख ने दीपांशी से संदिग्ध लेनदेन के बारे में पूछताछ की, तो उसने कथित तौर पर रोते हुए स्वीकार किया कि ये लेनदेन पाठक के निर्देश पर किए गए थे, जो उसका परिचित खाताधारक था। शिकायत में उसके हवाले से कहा गया है कि ये लेन-देन “खाताधारकों में से एक, आशुतोष पाठक… जो उसे जानता है” के निर्देशों पर किए गए थे।
बैंकिंग क्रेडेंशियल्स (ID-Password) का हुआ गलत इस्तेमाल
PNB की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिस्टम लॉग, यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड और लेन-देन की समीक्षा करने पर, ग्राहकों के खातों में लंबे समय तक कई अनधिकृत (बिना अनुमति के) लेन-देन होने का पता चला है। आरोप है कि ये लेन-देन अलग-अलग शाखा अधिकारियों की ‘कोर बैंकिंग सॉल्यूशन’ (CBS) यूजर ID का दुरुपयोग करके किए गए थे। बैंक का आरोप है कि दीपांशी ने इन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके ग्राहकों के खातों से अनधिकृत तरीके से पैसे निकाले (डेबिट किए)।
FIR में किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस?
CBI ने इस मामले में दीपांशी, पाठक और कुछ अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं लगाई गई हैं, जो आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों में हेराफेरी और लोक सेवकों द्वारा किए गए आपराधिक कदाचार से संबंधित हैं। इसके अलावा, इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) की धाराएं भी शामिल हैं। एजेंसी इस कथित धोखाधड़ी और इसमें शामिल हो सकने वाले अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *