डेस्क: लगातार खांसी और बार-बार चेस्ट इन्फेक्शन से परेशान एक 72 वर्षीय बुजुर्ग को डॉक्टरों ने फेफड़ों में ट्यूमर होने की आशंका जताई। लेकिन जब ब्रोंकोस्कोपी के जरिए सांस की नली की जांच की गई, तो अंदर का नजारा देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। जब डॉक्टरों ने उस संदिग्ध हिस्से की जांच की, तो उन्हें सांस की नली के अंदर गहराई में फंसा एक इंसानी दांत मिला, जो शायद लगभग तीन साल से वहां मौजूद था।
यह अनोखा मामला 31 अक्टूबर, 2026 को ‘द इजिप्शियन जर्नल ऑफ ब्रोंकोलोजी’ (स्प्रिंगर नेचर द्वारा प्रकाशित एक जर्नल) में छपी एक रिपोर्ट में सामने आया। इस व्यक्ति को कई महीनों से बलगम वाली खांसी और बार-बार लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (निचले श्वसन तंत्र) में इन्फेक्शन हो रहा था, जिसका इलाज कई बार एंटीबायोटिक्स से किया गया था। उसे दिल से जुड़ी बीमारी (कार्डियोवैस्कुलर डिसीज) थी, लेकिन कैंसर का कोई पुराना इतिहास नहीं था। इसके अलावा, उसका वजन बहुत कम नहीं हुआ था, न ही उसे बुखार, रात में पसीना आना या खांसी के साथ खून आने जैसी कोई समस्या थी।
डॉक्टरों को ट्यूमर का शक हुआ
सीटी स्कैन में उसके दाएं फेफड़े के निचले हिस्से में एक छोटी सांस की नली के अंदर रुकावट (ब्लॉकेज) दिखी, और उस रुकावट के आगे सूजन भी थी। डॉक्टरों को पहले लगा कि यह कोई ट्यूमर हो सकता है।
उन्होंने ब्रोंकोस्कोपी की, जिसमें एक लचीले उपकरण की मदद से सांस की नली के अंदर देखा जाता है। जांच में एक चिकना, लाल रंग का हिस्सा दिखा, जिसमें साफ तौर पर रक्त वाहिकाएं (blood vessels) नजर आ रही थीं। इसने सांस की नली के उस हिस्से को पूरी तरह से बंद कर दिया था। इसे देखकर ऐसा लगा कि यह ‘कार्सिनोइड ट्यूमर’ हो सकता है—एक ऐसा ट्यूमर जो फेफड़ों में विकसित हो सकता है।
रुकावट को दूर करने के लिए, डॉक्टरों ने ‘स्नेयर’ और ‘क्रायोप्रोब’ (एक ऐसा उपकरण जो ऊतकों को जमाकर पकड़ लेता है) की मदद से उस हिस्से को हटाना शुरू किया। जैसे ही उन्होंने सूजे हुए ऊतकों को हटाया, उसके नीचे एक सख्त, सफेद चीज दिखाई दी।
क्रायोप्रोब उस चिकनी और सख्त (कैल्सीफाइड) सतह को पकड़ नहीं पाया। कई कोशिशों के बाद, डॉक्टरों ने फोरसेप्स और रिट्रीवल बास्केट की मदद से उसे बाहर निकाला। पता चला कि वह एक इंसानी दांत था।
व्यक्ति को याद आया कि उसका एक दांत गायब था
जब उससे उसके मेडिकल और डेंटल इतिहास के बारे में दोबारा पूछा गया, तो उसे याद आया कि लगभग तीन साल पहले बेहोश होने की एक घटना के दौरान उसका एक दांत टूटकर गिर गया था। उसे कभी शक भी नहीं हुआ कि वह दांत सांस के जरिए अंदर चला गया होगा।
शोधकर्ताओं का मानना है कि बेहोश होने की उसी घटना के दौरान दांत उसकी सांस की नली में चला गया और किसी को पता भी नहीं चला। इसी वजह से वहां लगातार जलन होती रही और बार-बार इन्फेक्शन होता रहा। उन्होंने यह भी बताया कि मूल CT स्कैन में दिख रहा एक घना हिस्सा, जो दांत जैसा लग रहा था, उस पर शुरुआत में किसी का ध्यान नहीं गया था।
निकाले गए ऊतकों (टिश्यू) की जांच में सूजन तो दिखी, लेकिन कैंसर का कोई सबूत नहीं मिला। इस प्रक्रिया के बाद व्यक्ति के लक्षणों में सुधार हुआ, और बाद की जांच से पुष्टि हुई कि सांस की नली फिर से खुल गई है।
शोधकर्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे सांस के जरिए शरीर के अंदर गई बाहरी चीजें वयस्कों में सालों तक बिना पता चले रह सकती हैं, और कभी-कभी ऐसी गांठें बना सकती हैं जो बिल्कुल ट्यूमर जैसी दिखती हैं।


