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दिल्ली के अस्पतालों में स्टाफ की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, ICU हेल्पलाइन में जुड़ेंगी 10 नई लाइनें

डेस्क: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने ICU बेड की जानकारी देने वाली हेल्पलाइन में 10 नई लाइनें जोड़ने, अस्पतालों में खाली पड़े मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और मेडिकल डायरेक्टर के पद भरने और हजारों खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने को कहा है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने दिल्ली के 38 सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।

ICU हेल्पलाइन में जुड़ेंगी 10 नई लाइनें
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि CATS के टोल फ्री नंबर 102 पर 10 अतिरिक्त हेल्पलाइन लाइनें शुरू की जाएं। इन पर 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती भी की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिवारों को ICU बेड की उपलब्धता की जानकारी आसानी से मिल सके। अभी इस हेल्पलाइन पर 30 लाइनें हैं। नई लाइनें जुड़ने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 40 हो जाएगी। कोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को चार सप्ताह के भीतर जरूरी व्यवस्था करने और इसकी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट को बताया गया कि सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान हेल्पलाइन पर रोजाना काफी कॉल आ रही थीं। इस दौरान करीब 2,000 से 2,300 कॉल दर्ज की गईं और बड़ी संख्या में कॉल बीच में ही कट गईं। इसी वजह से अतिरिक्त लाइनें शुरू करने की जरूरत बताई गई। इसके अलावा, कोर्ट ने ICU बेड की जानकारी देने वाले रेफरल कोऑर्डिनेटर के नाम और मोबाइल व लैंडलाइन नंबर दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। इन कर्मचारियों की उपलब्धता की नियमित जांच भी की जाएगी।
अस्पतालों में खाली पड़े बड़े पद जल्द भरने के आदेश
हाईकोर्ट ने कुछ सरकारी अस्पतालों में नियमित मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं होने पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि डॉ. एनसी जोशी मेमोरियल अस्पताल और गुरु नानक आई सेंटर में नियमित MD या MS नहीं हैं। ऐसे में दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया कि राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण की बैठक बुलाने के लिए तुरंत कदम उठाएं। इन दोनों अस्पतालों में 30 नवंबर 2026 तक नियुक्तियां पूरी करने को कहा गया है। वहीं, सात सोसायटी संचालित अस्पतालों में डॉक्टरों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर काम चलाने की व्यवस्था पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों के बेहतर संचालन के लिए पूर्णकालिक मेडिकल सुपरिंटेंडेंट या मेडिकल डायरेक्टर जरूरी हैं। इन अस्पतालों में 25 नवंबर तक नियुक्तियां पूरी करने और 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
हजारों खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने को कहा
सुनवाई के दौरान अस्पतालों में कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर के 645 पद खाली हैं। नॉन-टीचिंग स्टाफ के 406 पद खाली हैं। पैरामेडिकल स्टाफ के 804 पद खाली हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को GDMO और नॉन-टीचिंग स्टाफ के खाली पदों की भर्ती के लिए दो सप्ताह के भीतर संघ लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग से भी कहा कि इस मामले में विशेष व्यवस्था करते हुए जनवरी से मार्च 2027 तक चलने वाले नियमित भर्ती चक्र का इंतजार किए बिना भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
जब तक स्थायी भर्ती नहीं होती, तब तक अस्पतालों के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और मेडिकल डायरेक्टर को नियमों के अनुसार संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति करने को कहा गया है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डीन और संबंधित बोर्ड को भी तीन श्रेणियों में संविदा कर्मचारियों की भर्ती दो महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। पैरामेडिकल पदों पर भी दो महीने के भीतर संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति करने को कहा गया है। वहीं, दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को अगली सुनवाई पर भर्ती प्रक्रिया की स्थिति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
अस्पतालों में जरूरी मशीनों की कमी भी होगी दूर
हाईकोर्ट ने दिल्ली के पांच बड़े सरकारी अस्पतालों को जरूरी और इस्तेमाल नहीं हो रहे मेडिकल उपकरणों की सूची तैयार करने को कहा है। इनमें लोकनायक अस्पताल, GTB अस्पताल, दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों को 30 नवंबर 2026 तक उपकरणों की जरूरत से जुड़ा प्रस्ताव दिल्ली सरकार को सौंपना होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी पर भी चिंता जताई। स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया गया कि MRI, अल्ट्रासाउंड और अन्य स्कैन जैसी जांच निजी अस्पतालों से कराने पर होने वाले खर्च का आकलन किया जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने से ज्यादा योग्य उम्मीदवारों को भर्ती के लिए आकर्षित किया जा सकता है या नहीं।
16 नवंबर को होगी सभी 38 अस्पतालों के अधिकारियों की बैठक
हाईकोर्ट ने दिल्ली के सभी 38 सरकारी अस्पतालों के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और मेडिकल डायरेक्टर को 16 नवंबर 2026 को बैठक करने का निर्देश दिया है। इस बैठक में अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ और मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए साझा रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 17 दिसंबर 2026 को होगी।

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