डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और केंद्र सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा है। इस याचिका में कक्षा 12 के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की गई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया और संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। यह जनहित याचिका पीतमपुरा के निवासी विशाल दुआ ने अपनी और 10 अन्य अभिभावकों की ओर से दायर की है। यह याचिका वकील नितिन मंगला के माध्यम से दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि कक्षा 12 की अकाउंटेंसी (लेखाशास्त्र) परीक्षा में बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए। साथ ही, गणित की परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने के मुद्दे पर किसी विशेषज्ञ निकाय से विचार-विमर्श कराया जाए।
याचिका के अनुसार, अकाउंटेंसी और गणित की परीक्षा देने वाले छात्रों को लंबी गणनाएं (calculations) हाथ से करने में काफी समय लग जाता है। इससे उनके पास अपनी वैचारिक समझ और कॉन्सेप्ट्स के अनुप्रयोग को प्रदर्शित करने के लिए कम समय बचता है।
याचिकाकर्ताओं ने बताया है कि CBSE की अपनी पाठ्यक्रम समिति (Curriculum Committee) ने 25 और 26 नवंबर, 2024 को हुई अपनी 70वीं बैठक में कक्षा 12 की अकाउंटेंसी परीक्षा में बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
इसके बाद, दिसंबर 2024 में इस प्रस्ताव को CBSE की गवर्निंग बॉडी के सामने रखा गया था। हालांकि, याचिका में दावा किया गया है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी इस सिफारिश को लागू नहीं किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देना ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020’ और ‘स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF), 2023’ के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप होगा। ये नीतियां रटने के बजाय वैचारिक समझ और उच्च-स्तरीय सोच (higher-order thinking) पर जोर देती हैं।
इसके अलावा, याचिका में यह मांग भी की गई है कि ‘डिस्कैलकुलिया’ (गणित सीखने में कठिनाई) वाले छात्रों को पहले से मिल रही कैलकुलेटर की सुविधा को, अन्य प्रकार की दिव्यांगता वाले छात्रों तक भी बढ़ाया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने अगस्त 2026 में CBSE और अन्य संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत आवेदन सौंपा था, जिसमें इस मामले पर तर्कपूर्ण जवाब मांगा गया था। हालाँकि, कथित तौर पर तय समय-सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा। यह याचिका भारत संघ, CBSE, NCERT और नेशनल असेसमेंट सेंटर के खिलाफ दायर की गई है।


