डेस्क: सर्दियों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में अक्सर किडनी (गुर्दे) से जुड़े खतरों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि ठंड का मौसम सीधे तौर पर किडनी फेलियर का कारण नहीं बनता है। हालांकि ठंड के मौसम में डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में बदलाव और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार जिन लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं या किडनी की बीमारियां हैं, उन्हें इस मौसम में खास सावधानी बरतने की जरूरत है। चलिए आज बताते हैं ठंड के महीनों में किडनी की सेहत का ख्याल रखने के तरीके
पानी की कमी ना होने दें
सर्दियों में अक्सर लोगों को प्यास कम लगती है, इसलिए वे पानी भी कम पीते हैं। दिन भर में एक निश्चित अंतराल पर तरल पदार्थ (पानी या अन्य पेय) पीते रहना जरूरी है।जिन मरीजों को किडनी की गंभीर बीमारी है या जो डायलिसिस पर हैं, उन्हें अपने डॉक्टरों द्वारा तय की गई तरल पदार्थों की मात्रा (fluid limits) का सख्ती से पालन करना चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि आइबुप्रोफेन और नेप्रोक्सन जैसी कुछ पेनकिलर किडनी में ब्लड फ्लो को कम कर सकती हैं। इससे किडनी में चोट लग सकती है, खासकर जब शरीर डिहाइड्रेटेड हो, इन दवाओं को लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से बात करें।”
अपनी बीमारियों पर नजर रखें
डॉक्टर कहते हैं कि यूरिन आउटपुट में कमी को नज़रअंदाज़ न करें और अगर यह सूजन, उल्टी या सांस लेने में दिक्कत के साथ हो तो तुरंत मदद लें। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या क्रोनिक किडनी डिजीज वाले लोगों को अपनी बीमारियों को मैनेज रखना चाहिए। बुखार, उल्टी या डायरिया के दौरान डॉक्टर से पूछे बिना दी गई दवाएं न बदलें।
रेगुलर जांच करवाएं
किडनी की बीमारी के शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते। इसलिए डॉक्टरी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज या फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों को रेगुलर टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। ठंडी हवा के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से अपना बीपी चेक करवाएं, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लें और फॉलो-अप अपॉइंटमेंट के लिए जरूर जाएं। अगर ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहे, तो यह धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
UTI के लक्षणों पर रखें नजर
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के कई लक्षण होते हैं। इनमें पेशाब करते समय जलन होना, बार-बार बाथरूम जाना, बुखार आना और पीठ दर्द शामिल हैं।इन लक्षणों का इलाज खुद से बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेकर न करें, इसमें सही मेडिकल सलाह लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर इन्फेक्शन का इलाज न किया जाए, तो यह किडनी तक फैल सकता है और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और शरीर में तरल पदार्थ (fluid) ज्यादा जमा हो सकता है। कोशिश करें कि ताजा बना हुआ खाना खाएं और कोई भी खाने-पीने की चीज खरीदने से पहले उसके लेबल को जरूर देख लें।”


